As-Saffat

سورة الصافات

सूरह 37 · मक्की · 182 आयतें

37:1जुज़ 23 · पृ. 446

وَالصَّافَّاتِ صَفًّا1

शपथ है पंक्तिवध्द (फ़रिश्तों) की!
37:2जुज़ 23 · पृ. 446

فَالزَّاجِرَاتِ زَجْرًا2

फिर झिड़कियाँ देने वालों की!
37:3जुज़ 23 · पृ. 446

فَالتَّالِيَاتِ ذِكْرًا3

फिर स्मरण करके पढ़ने वालों[1] की!
____________________
1. यह तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिये पंक्तिवध्द रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुर्आन तथा नमाज़ पढ़ने और उस की पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।
37:4जुज़ 23 · पृ. 446

إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَاحِدٌ4

निश्चय तुम्हारा पूज्य, एक ही है।
37:5जुज़ 23 · पृ. 446

رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ الْمَشَارِقِ5

आकाशों तथा धरती का पालनहार तथा जो कुछ उनके मध्य है और सुर्योदय होने के स्थानों का रब।
37:6जुज़ 23 · पृ. 446

إِنَّا زَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِزِينَةٍ الْكَوَاكِبِ6

हमने अलंकृत किया है संसार (समीप) के आकाश को, तारों की शोभा से।
37:7जुज़ 23 · पृ. 446

وَحِفْظًا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ مَارِدٍ7

तथा रक्षा करने के लिए प्रत्येक उध्दत शैतान से।
37:8जुज़ 23 · पृ. 446

لَا يَسَّمَّعُونَ إِلَى الْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِنْ كُلِّ جَانِبٍ8

वह नहीं सुन सकते (जाकर) उच्च सभा तक फ़रिश्तों की बात तथा मारे जाते हैं, प्रत्येक दिशा से।
37:9जुज़ 23 · पृ. 446

دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ9

राँदने के लिए तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
37:10जुज़ 23 · पृ. 446

إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ10

परन्तु, जो ले उड़े कुछ, तो पीछा करती है उसका दहकती ज्वाला।[1]
____________________
1. फिर यदि उस से बचा रह जाये तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहूँचाता है और वह उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिला कर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6213, सह़ीह़ मुस्लिमः2228)
37:11जुज़ 23 · पृ. 446

فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمْ مَنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُمْ مِنْ طِينٍ لَازِبٍ11

तो आप इन (काफ़िरों) से प्रश्न करें कि क्या उन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या जिन्हें[1] हमने पैदा किया है? हमने उन्हें[2] पैदा किया है, लेसदार मिट्टी से।
____________________
1. अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। 2. उन के पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।
37:12जुज़ 23 · पृ. 446

بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ12

बल्कि आपने आश्चर्य किया (उनके अस्वीकार पर) तथा वे उपहास करते हैं।
37:13जुज़ 23 · पृ. 446

وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ13

और जब शिक्षा दी जाये, तो वे शिक्षा ग्रहण नहीं करते।
37:14जुज़ 23 · पृ. 446

وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ14

और जब देखते हैं कोई निशानी, तो उपहास करने लगते हैं।
37:15जुज़ 23 · पृ. 446

وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُبِينٌ15

तथा कहते हें कि ये तो मात्र खुला जादू है।
37:16जुज़ 23 · पृ. 446

أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ16

(कहते हैं कि) क्या, जब हम मर जायेंगे तथा मिट्टी और हड्डियाँ हो जायेंगे, तो हम निश्चय पुनः जीवित किये जायेंगे?
37:17जुज़ 23 · पृ. 446

أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ17

और क्या, हमारे पहले पूर्वज भी (जीवित किये जायेंगे)?
37:18जुज़ 23 · पृ. 446

قُلْ نَعَمْ وَأَنْتُمْ دَاخِرُونَ18

आप कह दें कि हाँ तथा तुम अपमानित (भी) होगे!
37:19जुज़ 23 · पृ. 446

فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنْظُرُونَ19

वो तो बस एक झिड़की होगी, फिर सहसा वे देख रहे होंगे।
37:20जुज़ 23 · पृ. 446

وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ20

तथा कहेंगेः हाय हमारा विनाश! ये तो बदले (प्रलय) का दिन है।
37:21जुज़ 23 · पृ. 446

هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنْتُمْ بِهِ تُكَذِّبُونَ21

यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठला रहे थे।
37:22जुज़ 23 · पृ. 446

۞ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ22

(आदेश होगा कि) घेर लाओ सब अत्याचारियों को तथा उनके साथियों को और जिसकी वे इबादत (वंदना) कर रहे थे।
37:23जुज़ 23 · पृ. 446

مِنْ دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ23

अल्लाह के सिवा। फिर दिखा दो उन्हें नरक की राह।
37:24जुज़ 23 · पृ. 446

وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُمْ مَسْئُولُونَ24

और उन्हें रोक[1] लो। उनसे प्रश्न किया जाये।
____________________
1. नरक में झोंकने से पहले।
37:25जुज़ 23 · पृ. 447

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ25

क्या हो गया है तुम्हें कि एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
37:26जुज़ 23 · पृ. 447

بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ26

बल्कि वे उस दिन, सिर झुकाये खड़े होंगे।
37:27जुज़ 23 · पृ. 447

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ27

और एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर प्रश्न करेंगेः[1]
____________________
1. अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।
37:28जुज़ 23 · पृ. 447

قَالُوا إِنَّكُمْ كُنْتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ28

कहेंगे कि तुम हमारे पास आया करते थे दायें[1] से।
____________________
1. इस से अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।
37:29जुज़ 23 · पृ. 447

قَالُوا بَلْ لَمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ29

वे[1] कहेंगेः बल्कि तुम स्वयं ईमान वाले न थे।
____________________
1. इस से अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।
37:30जुज़ 23 · पृ. 447

وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُمْ مِنْ سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنْتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ30

तथा नहीं था हमारा तुमपर कोई अधिकार,[1] बल्कि तुम सवंय अवज्ञाकारी थे।
____________________
1. देखियेः सूरह इब्राहीम, आयतः22
37:31जुज़ 23 · पृ. 447

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ31

तो सिध्द हो गया हमपर हमारे पालनहार का कथन कि हम (यातना) चखने वाले हैं।
37:32जुज़ 23 · पृ. 447

فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ32

तो हमने तुम्हें कुपथ कर दिया। हम तो स्वयं कुपथ थे।
37:33जुज़ 23 · पृ. 447

فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ33

फिर वे सभी, उस दिन यातना में साझी होंगे।
37:34जुज़ 23 · पृ. 447

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ34

हम, इसी प्रकार, किया करते हैं अपराधियों के साथ।
37:35जुज़ 23 · पृ. 447

إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ35

ये वो हैं कि जब कहा जाता था उनसे कि कोई पूज्य (वंदनीय) नहीं अल्लाह के अतिरिक्त, तो वे अभिमान करते थे।
37:36जुज़ 23 · पृ. 447

وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَجْنُونٍ36

तथा कह रहे थेः क्या हम त्याग देने वाले हैं अपने पूज्यों को, एक उन्मत कवि के कारण?
37:37जुज़ 23 · पृ. 447

بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ37

बल्कि वह (नबी) सच लाये हैं तथा पुष्टि की है, सब रसूलों की।
37:38जुज़ 23 · पृ. 447

إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ38

निश्चय तुम दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
37:39जुज़ 23 · पृ. 447

وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ39

तथा तुम उसका प्रतिकार (बदला) दिये जाओगे, जो तुम कर रहे थे।
37:40जुज़ 23 · पृ. 447

إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ40

परन्तु अल्लाह के शुध्द भक्त।
37:41जुज़ 23 · पृ. 447

أُولَٰئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَعْلُومٌ41

यही हैं, जिनके लिए विदित जीविका है।
37:42जुज़ 23 · पृ. 447

فَوَاكِهُ ۖ وَهُمْ مُكْرَمُونَ42

प्रत्येक प्रकार के फल तथा यही आदरणीय होंगे।
37:43जुज़ 23 · पृ. 447

فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ43

सुख के स्वर्गों में।
37:44जुज़ 23 · पृ. 447

عَلَىٰ سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ44

आसनों पर एक-दूसरे के सम्मुख असीन होंगे।
37:45जुज़ 23 · पृ. 447

يُطَافُ عَلَيْهِمْ بِكَأْسٍ مِنْ مَعِينٍ45

फिराये जायेंगे इनपर प्याले, प्रवाहित पेय के।
37:46जुज़ 23 · पृ. 447

بَيْضَاءَ لَذَّةٍ لِلشَّارِبِينَ46

श्वेत आस्वात पीने वालों के लिए।
37:47जुज़ 23 · पृ. 447

لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنْزَفُونَ47

नहीं होगी उसमें शारिरिक पीड़ा, न वे उसमें बहकेंगे।
37:48जुज़ 23 · पृ. 447

وَعِنْدَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ عِينٌ48

तथा उनके पास आँखे झुकाये, (सति) बड़ी आँखों वाली (नारियाँ) होंगी।
37:49जुज़ 23 · पृ. 447

كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَكْنُونٌ49

वह छुपाये हुए अन्डों के मानिन्द होंगी।[1]
____________________
1. अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छुपे हुये अन्डे सुरक्षित होते हैं वैसे ही वह नारियाँ सुरक्षित, सुन्दर रंग और रूप की होंगी।
37:50जुज़ 23 · पृ. 447

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ50

वह एक-दूसरे से सम्मुख होकर प्रश्न करेंगे।
37:51जुज़ 23 · पृ. 447

قَالَ قَائِلٌ مِنْهُمْ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٌ51

तो कहेगा एक कहने वाला उनमें सेः मेरा एक साथी था।
37:52जुज़ 23 · पृ. 448

يَقُولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ52

जो कहता था कि क्या तुम (प्रलय का) विश्वास करने वालों में से हो?
37:53जुज़ 23 · पृ. 448

أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ53

क्या जब हम, मर जायेंगे तथा मिट्टी और अस्थियाँ हो जायेंगे, तो क्या हमें (कर्मों) का प्रतिफल दिया जायेगा?
37:54जुज़ 23 · पृ. 448

قَالَ هَلْ أَنْتُمْ مُطَّلِعُونَ54

वह कहेगाः क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?
37:55जुज़ 23 · पृ. 448

فَاطَّلَعَ فَرَآهُ فِي سَوَاءِ الْجَحِيمِ55

फिर झाँकते ही उसे देख लेगा, नरक के बीच।
37:56जुज़ 23 · पृ. 448

قَالَ تَاللَّهِ إِنْ كِدْتَ لَتُرْدِينِ56

उससे कहेगाः अल्लाह की शपथ! तुम तो मेरा विनाश कर देने के समीप थे।
37:57जुज़ 23 · पृ. 448

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّي لَكُنْتُ مِنَ الْمُحْضَرِينَ57

और यदि मेरे पालनहार का अनुग्रह न होता, तो मैं (नरक के) उपस्थितों में होता।
37:58जुज़ 23 · पृ. 448

أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ58

फिर वह कहेगाः क्या (ये सही नहीं है कि) हम मरने वाले नहीं हैं?
37:59जुज़ 23 · पृ. 448

إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ59

सिवाय अपनी प्रथम मौत के और न हमें यातना दी जायेगी।
37:60जुज़ 23 · पृ. 448

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ60

वास्तव में, यही बड़ी सफलता है।
37:61जुज़ 23 · पृ. 448

لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ61

इसी (जैसी सफलता) के लिए चाहिये कि कर्म करें, कर्म करने वाले।
37:62जुज़ 23 · पृ. 448

أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ62

क्या ये आतिथ्य उत्तम है अथवा थोहड़ का वृक्ष?
37:63जुज़ 23 · पृ. 448

إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِلظَّالِمِينَ63

हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
37:64जुज़ 23 · पृ. 448

إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ64

वह एक वृक्ष है, जो नरक की जड़ (तह) से निकलता है।
37:65जुज़ 23 · पृ. 448

طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ65

उसके गुच्छे शैतानों के सिरों के समान हैं।
37:66जुज़ 23 · पृ. 448

فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ66

तो वे (नरक वासी) खाने वाले हैं, उससे। फिर भरने वाले हैं, उससे अपने पेट।
37:67जुज़ 23 · पृ. 448

ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِنْ حَمِيمٍ67

फिर उनके लिए उसके ऊपर से खौलता गरम पानी है।
37:68जुज़ 23 · पृ. 448

ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى الْجَحِيمِ68

फिर उन्हें प्रत्यागत होना है, नरक की ओर।
37:69जुज़ 23 · पृ. 448

إِنَّهُمْ أَلْفَوْا آبَاءَهُمْ ضَالِّينَ69

वास्तव में, उन्होंने पाया अपने पूर्वजों को कुपथ।
37:70जुज़ 23 · पृ. 448

فَهُمْ عَلَىٰ آثَارِهِمْ يُهْرَعُونَ70

फिर वे उन्हीं के पद्चिन्हों पर[1] दौड़े चले जा रहे हैं।
____________________
1. इस में नरक में जाने का जो सब से बड़ा कारण बताया गया है वह है नबी को न मानना, और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।
37:71जुज़ 23 · पृ. 448

وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ الْأَوَّلِينَ71

और कुपथ हो चुके हैं, इनसे पूर्व अगले लोगों में से अधिक्तर।
37:72जुज़ 23 · पृ. 448

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِمْ مُنْذِرِينَ72

तथा हम भेज चुके हैं उनमें, सचेत (सावधान) करने वाले।
37:73जुज़ 23 · पृ. 448

فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنْذَرِينَ73

तो देखो कि कैसा रहा सावधान किये हुए लोगों का परिणाम?[1]
____________________
1. अतः उन के दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये।
37:74जुज़ 23 · पृ. 448

إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ74

हमारे शुध्द भक्तों के सिवा।
37:75जुज़ 23 · पृ. 448

وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ75

तथा हमें पुकारा नूह़ नेः तो हम क्या ही अच्छे प्रार्थना स्वीकार करने वाले हैं।
37:76जुज़ 23 · पृ. 448

وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ76

और हमने बचा लिया उसे और उसके परिजनों को, घोर आपदा से।
37:77जुज़ 23 · पृ. 449

وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ77

तथा कर दिया हमने उसकी संतति को, शेष[1] रह जाने वालों में से।
____________________
1. उस की जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।
37:78जुज़ 23 · पृ. 449

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ78

तथा शेष रखा हमने उसकी सराहना तथा प्रशंसा को पिछलों में।
37:79जुज़ 23 · पृ. 449

سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ79

सलाम (सुरक्षा)[1] है नूह़ के लिए समस्त विश्ववासियों में।
____________________
1. अर्थात उस की बुरी चर्चा से।
37:80जुज़ 23 · पृ. 449

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ80

इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
37:81जुज़ 23 · पृ. 449

إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ81

वास्तव में, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
37:82जुज़ 23 · पृ. 449

ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ82

फिर हमने जलमगन कर दिया दूसरों को।
37:83जुज़ 23 · पृ. 449

۞ وَإِنَّ مِنْ شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ83

और उसके अनुयायियों में निश्चय इब्राहीम है।
37:84जुज़ 23 · पृ. 449

إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ84

जब लाया वह अपने पालनहार के पास स्वच्छ दिल।
37:85जुज़ 23 · पृ. 449

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَاذَا تَعْبُدُونَ85

जब कहा उसने अपने पिता तथा अपनी जाति सेः तुम किसकी इबादत (वंदना) कर रहे हो?
37:86जुज़ 23 · पृ. 449

أَئِفْكًا آلِهَةً دُونَ اللَّهِ تُرِيدُونَ86

क्या अपने बनाये हुए पूज्यों को अल्लाह के सिवा चाहते हो?
37:87जुज़ 23 · पृ. 449

فَمَا ظَنُّكُمْ بِرَبِّ الْعَالَمِينَ87

तो तुम्हारा क्या विचार है, विश्व के पालनहार के विषय में?
37:88जुज़ 23 · पृ. 449

فَنَظَرَ نَظْرَةً فِي النُّجُومِ88

फिर उसने देखा तोरों की[1] ओर।
____________________
1. यह सोचते हुये कि इन के उत्सव में न जाने के लिये क्या बहाना करूँ।
37:89जुज़ 23 · पृ. 449

فَقَالَ إِنِّي سَقِيمٌ89

तथा उनसे कहाः मैं रोगी हूँ।
37:90जुज़ 23 · पृ. 449

فَتَوَلَّوْا عَنْهُ مُدْبِرِينَ90

तो उसे छोड़कर चले गये।
37:91जुज़ 23 · पृ. 449

فَرَاغَ إِلَىٰ آلِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ91

फिर वह जा पहुँचा, उनके उपास्यों (पूज्यों) की ओर। कहा कि (वे प्रसाद) क्यों नहीं खाते?
37:92जुज़ 23 · पृ. 449

مَا لَكُمْ لَا تَنْطِقُونَ92

तुम्हें क्या हुआ है कि बोलते नहीं?
37:93जुज़ 23 · पृ. 449

فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًا بِالْيَمِينِ93

फिर पिल पड़ा उनपर मारते हुए, दायें हाथ से।
37:94जुज़ 23 · पृ. 449

فَأَقْبَلُوا إِلَيْهِ يَزِفُّونَ94

तो वे आये उसकी ओर दौड़ते हुए।
37:95जुज़ 23 · पृ. 449

قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ95

इब्राहीम ने कहाः क्या तुम इबादत (वंदना) करते हो उसकी जिसे, पत्थरों से तराश्ते हो?
37:96जुज़ 23 · पृ. 449

وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ96

जबकि अल्लाह ने पैदा किया है तुम्हें तथा जो तुम करते हो।
37:97जुज़ 23 · पृ. 449

قَالُوا ابْنُوا لَهُ بُنْيَانًا فَأَلْقُوهُ فِي الْجَحِيمِ97

उन्होंने कहाः इसके लिए एक (अग्निशाला का) निर्माण करो और उसे झोंक दो दहकती अग्नि में।
37:98जुज़ 23 · पृ. 449

فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ98

तो उन्होंने उसके साथ षड्यंत्र रचा, तो हमने उन्हीं को नीचा कर दिया।
37:99जुज़ 23 · पृ. 449

وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ99

तथा उसने कहाः मैं जाने वाला हूँ अपने पालनहार की[1] ओर। वह मुझे सुपथ दर्शायेगा।
____________________
1. अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।
37:100जुज़ 23 · पृ. 449

رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ100

हे मेरे पालनहार! प्रदान कर मुझे, एक सदाचारी (पुनीत) पुत्र।
37:101जुज़ 23 · पृ. 449

فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ101

तो हमने शुभ सूचना दी उसे, एक सहनशील पुत्र की।
37:102जुज़ 23 · पृ. 449

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانْظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِنْ شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ102

फिर जब वह पहुँचा उसके साथ चलने-फिरने की आयु को, तो इब्राहीम ने कहाः हे मेरे प्रिय पुत्र! मैं देख रहा हूँ स्वप्न में कि मैं तुझे वध कर रहा हूँ। अब, तू बता कि तेरा क्या विचार है? उसने कहाः हे पिता! पालन करें, जिसका आदेश आपको दिया जा रहा है। आप पायेंगे मुझे सहनशीलों में से, यदि अल्लाह की इच्छा हूई।
37:103जुज़ 23 · पृ. 450

فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ103

अन्ततः, जब दोनों ने स्वयं को अर्पित कर दिया और उस (पिता) ने उसे गिरा दिया माथे के बल।
37:104जुज़ 23 · पृ. 450

وَنَادَيْنَاهُ أَنْ يَا إِبْرَاهِيمُ104

तब हमने उसे आवाज़ दी कि हे इब्राहीम!
37:105जुज़ 23 · पृ. 450

قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ105

तूने सच कर दिया अपना स्वप्न। इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
37:106जुज़ 23 · पृ. 450

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ106

वास्तव में, ये खुली परीक्षा थी।
37:107जुज़ 23 · पृ. 450

وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ107

और हमने उसके मुक्ति-प्रतिदान के रूप में, प्रदान कर दी एक महान[1] बली।
____________________
1. यह महान बलि एक मेंढा था। जिसे जिब्रील (अलाहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आप के प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर बलि दिया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिये अल्लाह के सामिप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़्ह़ा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़्ह़ा में करते हैं।
37:108जुज़ 23 · पृ. 450

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ108

तथा हमने शेष रखी उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
37:109जुज़ 23 · पृ. 450

سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ109

सलाम है इब्रीम पर।
37:110जुज़ 23 · पृ. 450

كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ110

इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
37:111जुज़ 23 · पृ. 450

إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ111

निश्चय ही वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
37:112जुज़ 23 · पृ. 450

وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِنَ الصَّالِحِينَ112

तथा हमने उसे शुभसूचना दी इस्ह़ाक़ नबी की, जो सदाचारियों में[1] होगा।
____________________
1. इस आयत से विद्वत होता है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इस्ह़ाक़ की शुभ सूचना दी गई। इस से ज्ञान हुआ की बलि इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-लग चौदह वर्ष का अन्तर है।
37:113जुज़ 23 · पृ. 450

وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِنْ ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِنَفْسِهِ مُبِينٌ113

तथा हमने बरकत (विभूति) अवतरिक की उसपर तथा इस्ह़ाक़ पर और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने लिए खुला अत्याचारी।
37:114जुज़ 23 · पृ. 450

وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ114

तथा हमने उपकार किया मूसा और हारून पर।
37:115जुज़ 23 · पृ. 450

وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ115

तथा मुक्त किया दोनों को और उनकी जाति को, घोर व्यग्रता से।
37:116जुज़ 23 · पृ. 450

وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ116

तथा हमने सहायता की उनकी, तो वही प्रभावशाली हो गये।
37:117जुज़ 23 · पृ. 450

وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ117

तथा हमने प्रदान की दोनों को प्रकाशमय पुस्तक (तौरात)।
37:118जुज़ 23 · पृ. 450

وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ118

और हमने दर्शाई दोनों को सीधी डगर।
37:119जुज़ 23 · पृ. 450

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ119

तथा शेष रखी दोनों की शुभ चर्चा, पिछलों में।
37:120जुज़ 23 · पृ. 450

سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ120

सलाम है मूसा तथा हारून पर।
37:121जुज़ 23 · पृ. 450

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ121

हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
37:122जुज़ 23 · पृ. 450

إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ122

वस्तुतः, वे दोनों हमारे ईमान वाले भक्तों में थे।
37:123जुज़ 23 · पृ. 450

وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ123

तथा निश्चय इल्यास, नबियों में से था।
37:124जुज़ 23 · पृ. 450

إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَلَا تَتَّقُونَ124

जब कहा उसने अपनी जाति सेः क्या तुम डरते नहीं हो?
37:125जुज़ 23 · पृ. 450

أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ الْخَالِقِينَ125

क्या तुम बअल ( नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा त्याग रहे हो सर्वोत्तम उत्पत्तिकर्ता को?
37:126जुज़ 23 · पृ. 450

اللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ126

अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे प्रथम पूर्वजों का पालनहार है।
37:127जुज़ 23 · पृ. 451

فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ127

अन्ततः, उन्होंने झुठला दिया उसे। तो निश्चय वही (नरक में) उपस्थित होंगे।
37:128जुज़ 23 · पृ. 451

إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ128

किन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।
37:129जुज़ 23 · पृ. 451

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ129

तथा शेष रखी हमने उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
37:130जुज़ 23 · पृ. 451

سَلَامٌ عَلَىٰ إِلْ يَاسِينَ130

सलाम है इल्यासीन[1] पर।
____________________
1. इल्यासीन इल्यास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रन्थों में इलया भी कहा गया है।
37:131जुज़ 23 · पृ. 451

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ131

वास्तव में, हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
37:132जुज़ 23 · पृ. 451

إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ132

वस्तुतः, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
37:133जुज़ 23 · पृ. 451

وَإِنَّ لُوطًا لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ133

तथा निश्चय लूत नबियों में से था।
37:134जुज़ 23 · पृ. 451

إِذْ نَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ134

जब हमने मुक्त किया उसे तथा उसके सबपरिजनों को।
37:135जुज़ 23 · पृ. 451

إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ135

एक बुढ़िया[1] के सिवा, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
____________________
1. यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नि थी।
37:136जुज़ 23 · पृ. 451

ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ136

फिर हमने अन्यों को तहस-नहस कर दिया।
37:137जुज़ 23 · पृ. 451

وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِمْ مُصْبِحِينَ137

तथा तुम[1] ग़ुज़रते हो उन (की निर्जीव बस्तियों) पर, प्रातः के समय।
____________________
1. मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।
37:138जुज़ 23 · पृ. 451

وَبِاللَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ138

तथा रात्रि में। तो क्या तुम समझते नहीं हो?
37:139जुज़ 23 · पृ. 451

وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ139

तथा निश्चय यूनुस नबियों में से था।
37:140जुज़ 23 · पृ. 451

إِذْ أَبَقَ إِلَى الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ140

जब वह भाग[1] गया भरी नाव की ओर।
____________________
1. अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आन की सूचना दे कर निकल गये। और नाव पर सवार हो गये। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इस लिये बोझ कम करने के लिये नाम निकाला गया। तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।
37:141जुज़ 23 · पृ. 451

فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِينَ141

फिर नाम निकाला गया, तो वह हो गया फेंके हुओं में से।
37:142जुज़ 23 · पृ. 451

فَالْتَقَمَهُ الْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ142

तो निगल लिया उसे मछली ने और वह निन्दित था।
37:143जुज़ 23 · पृ. 451

فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ143

तो यदि न होता अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में।
37:144जुज़ 23 · पृ. 451

لَلَبِثَ فِي بَطْنِهِ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ144

तो वह रह जाता उसके उदर में उस दिन तक, जब सब पुनः जीवित किये[1] जायेंगे।
____________________
1. अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखियेः सूरह अम्बिया, आयतः87)
37:145जुज़ 23 · पृ. 451

۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ145

तो हमने फेंक दिया उसे खुले मैदान में और वह रोगी[1] था।
____________________
1. अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।
37:146जुज़ 23 · पृ. 451

وَأَنْبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِنْ يَقْطِينٍ146

और उगा दिया उस[1] पर लताओं का एक वृक्ष।
____________________
1. रक्षा के लिये।
37:147जुज़ 23 · पृ. 451

وَأَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ147

तथा हमने उसे रसूल बनाकर भेजा एक लाख, बल्कि अधिक की ओर।
37:148जुज़ 23 · पृ. 451

فَآمَنُوا فَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ148

तो वे ईमान लाये। फिर हमने उन्हें सुख-सुविधा प्रदान की एक समय[1] तक।
____________________
1. देखियेः सूरह यूनुस।
37:149जुज़ 23 · पृ. 451

فَاسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُونَ149

तो (हे नबी!) आप उनसे प्रश्न करें कि क्या आपके पालनहार के लिए तो पुत्रियाँ हों और उनके लिए पुत्र?
37:150जुज़ 23 · पृ. 451

أَمْ خَلَقْنَا الْمَلَائِكَةَ إِنَاثًا وَهُمْ شَاهِدُونَ150

अथवा किया हमने पैदा किया है फ़रिश्तों को नारियाँ और वे उस समय उपस्थित[1] थे?
____________________
1. इस में मक्का के मिश्रणवादियों का खण्डन किया जा रहा है जो फ़रिश्तों को देवियाँ तथा अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जब कि वह स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।
37:151जुज़ 23 · पृ. 451

أَلَا إِنَّهُمْ مِنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ151

सावधान! वास्तव में, वे अपने मन से बनाकर ये बात कह रहे हैं।
37:152जुज़ 23 · पृ. 451

وَلَدَ اللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ152

कि अल्लाह ने संतान बनाई है और निश्चय ये मिथ्या भाषी हैं।
37:153जुज़ 23 · पृ. 451

أَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِينَ153

क्या अल्लाह ने प्राथमिक्ता दी है पुत्रियों को, पुत्रों पर?
37:154जुज़ 23 · पृ. 452

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ154

तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा निर्णय दे रहे हो?
37:155जुज़ 23 · पृ. 452

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ155

तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
37:156जुज़ 23 · पृ. 452

أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُبِينٌ156

अथवा तुम्हारे पास कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है?
37:157जुज़ 23 · पृ. 452

فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ157

तो अपनी पुस्तक लाओ, यदि तुम सत्यवादी हो?
37:158जुज़ 23 · पृ. 452

وَجَعَلُوا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ158

और उन्होंने बना दिया अल्लाह तथा जिन्नों के मध्य, वंश-संबंध। जबकि जिन्न स्वयं जानते हैं कि वे अल्लाह के समक्ष निश्चय उपस्थित किये[1] जायेंगे।
____________________
1. अर्थात यातना के लिये। तो यदि वे उस के संबंधी होते तो उन्हें यातना क्यों देता?
37:159जुज़ 23 · पृ. 452

سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ159

अल्लाह पवित्र है उन गुणों से, जिनका वे वर्णन कर रहे हैं।
37:160जुज़ 23 · पृ. 452

إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ160

परन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।[1]
____________________
1. वह अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।
37:161जुज़ 23 · पृ. 452

فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ161

तो निश्चय तुम तथा तुम्हारे पूज्य।
37:162जुज़ 23 · पृ. 452

مَا أَنْتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ162

तुम सब किसी एक को भी कुपथ नहीं कर सकते।
37:163जुज़ 23 · पृ. 452

إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ الْجَحِيمِ163

उसके सिवा, जो नरक में झोंका जाने वाला है।
37:164जुज़ 23 · पृ. 452

وَمَا مِنَّا إِلَّا لَهُ مَقَامٌ مَعْلُومٌ164

और नहीं है हम (फ़रिश्तों) में से कोई, परन्तु उसका एक नियमित स्थान है।
37:165जुज़ 23 · पृ. 452

وَإِنَّا لَنَحْنُ الصَّافُّونَ165

तथा हम ही (आज्ञापालन के लिए) पंक्तिवध्द हैं।
37:166जुज़ 23 · पृ. 452

وَإِنَّا لَنَحْنُ الْمُسَبِّحُونَ166

और हम ही तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
37:167जुज़ 23 · पृ. 452

وَإِنْ كَانُوا لَيَقُولُونَ167

तथा वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे किः
37:168जुज़ 23 · पृ. 452

لَوْ أَنَّ عِنْدَنَا ذِكْرًا مِنَ الْأَوَّلِينَ168

यदि हमारे पास कोई स्मृति (पुस्तक) होती, जो पहले लोगों में आई......
37:169जुज़ 23 · पृ. 452

لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ169

तो हम अवश्य अल्लाह के शुध्द भक्तों में हो जाते।
37:170जुज़ 23 · पृ. 452

فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ170

(फिर जब आ गयी) तो उन्होंने क़ुर्आन के साथ कुफ़्र कर दिया, अतः, शीघ्र ही उन्हें ज्ञान हो जायेगा।
37:171जुज़ 23 · पृ. 452

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا الْمُرْسَلِينَ171

और पहले ही हमारा वचन हो चुका है अपने भेजे हुए भक्तों के लिए।
37:172जुज़ 23 · पृ. 452

إِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنْصُورُونَ172

कि निश्चय उन्हीं की सहायता की जायेगी।
37:173जुज़ 23 · पृ. 452

وَإِنَّ جُنْدَنَا لَهُمُ الْغَالِبُونَ173

तथा वास्तव में हमारी सेना ही प्रभावशाली (विजयी) होने वाली है।
37:174जुज़ 23 · पृ. 452

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ174

तो आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
37:175जुज़ 23 · पृ. 452

وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ175

तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।
37:176जुज़ 23 · पृ. 452

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ176

तो क्या, वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं।
37:177जुज़ 23 · पृ. 452

فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنْذَرِينَ177

तो जब वह उतर आयेगी उनके मैदानों में, तो बुरा हो जायेगा सावधान किये हुओं का सवेरा।
37:178जुज़ 23 · पृ. 452

وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ178

और आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
37:179जुज़ 23 · पृ. 452

وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ179

तथा देखते रहें, अन्ततः वे (भी) देख लेंगे।
37:180जुज़ 23 · पृ. 452

سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ180

पवित्र है आपका पालनहार, गौरव का स्वामी, उस बात से, जो वे बना रहे हैं।
37:181जुज़ 23 · पृ. 452

وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ181

तथा सलाम है रसूलों पर।
37:182जुज़ 23 · पृ. 452

وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ182

तथा सभी प्रशंसा, अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार के लिए है।

सूरह के आरंभ से चलाएँ