सूरह 37 · जुज़ 23
As-Saffat · 37:166
وَإِنَّا لَنَحْنُ الْمُسَبِّحُونَ
और हम ही तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
तफ़सीर
165 - 166- तथा निःसंदेह हम - फ़रिश्ते - अल्लाह की इबादत और उसके आज्ञापालन में पंक्तियों में खड़े रहते हैं। और निश्चय हम अल्लाह को उन विशेषताओं और गुणों से पवित्र ठहराते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं।
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