सूरह 37 · जुज़ 23
As-Saffat · 37:65
طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ
उसके गुच्छे शैतानों के सिरों के समान हैं।
तफ़सीर
इसका जो फल निकलता है, वह देखने में बद्सूरत होता है, मानो वह शैतानों का सिर हो, और दृष्टि की कुरूपता अंतरमन की कुरूपता का प्रमाण है। और इसका अर्थ यह है कि इसके फल का स्वाद बहुत खराब है।
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