सूरह 37 · जुज़ 23
As-Saffat · 37:1
وَالصَّافَّاتِ صَفًّا
शपथ है पंक्तिवध्द (फ़रिश्तों) की!
तफ़सीर
मैं उन फ़रिश्तों की क़सम खाता हूँ जो अपनी इबादत में एक दूसरे से मिलकर पंक्तिबद्ध खड़े होते हैं।
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सूरह 37 · जुज़ 23
وَالصَّافَّاتِ صَفًّا
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