सूरह 37 · जुज़ 23
As-Saffat · 37:35
إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ
ये वो हैं कि जब कहा जाता था उनसे कि कोई पूज्य (वंदनीय) नहीं अल्लाह के अतिरिक्त, तो वे अभिमान करते थे।
तफ़सीर
इन मुश्रिकों से जब दुनिया में कहा जाता था कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, ताकि उसकी अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करें और उसके विपरीत चीज़ों को छोड़ दें, तो वे सत्य से अभिमान और घमंड करते हुए उसे क़बूल करने और मानने से इनकार कर देते थे।
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