Al-Infitar

سورة الإنفطار

सूरह 82 · मक्की · 19 आयतें

82:1जुज़ 30 · पृ. 587

إِذَا السَّمَاءُ انْفَطَرَتْ1

जब आकाश फट जायेगा।
82:2जुज़ 30 · पृ. 587

وَإِذَا الْكَوَاكِبُ انْتَثَرَتْ2

तथा जब तारे झड़ जायेंगे।
82:3जुज़ 30 · पृ. 587

وَإِذَا الْبِحَارُ فُجِّرَتْ3

और जब सागर उबल पड़ेंगे।
82:4जुज़ 30 · पृ. 587

وَإِذَا الْقُبُورُ بُعْثِرَتْ4

और जब समाधियाँ (क़बरें) खोल दी जायेंगी।
82:5जुज़ 30 · पृ. 587

عَلِمَتْ نَفْسٌ مَا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ5

तब प्रत्येक प्राणी को ज्ञान हो जायेगा, जो उसने किया है और नहीं किया है।[1]
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1. (1-5) इन में प्रलय के दिन आकाश ग्रहों तथा धरती और समाधियों पर जो दशा गुज़रेगी उस का चित्रण किया गया है। तथा चेतावनी दी गई है कि सब के कर्तूत उस के सामने आ जायेंगे।
82:6जुज़ 30 · पृ. 587

يَا أَيُّهَا الْإِنْسَانُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ الْكَرِيمِ6

हे इन्सान! तुझे किस वस्तु ने तेरे उदार पालनहार से बहका दिया?
82:7जुज़ 30 · पृ. 587

الَّذِي خَلَقَكَ فَسَوَّاكَ فَعَدَلَكَ7

जिसने तेरी रचना की, फिर तुझे संतुलित बनाया।
82:8जुज़ 30 · पृ. 587

فِي أَيِّ صُورَةٍ مَا شَاءَ رَكَّبَكَ8

जिस रूप में चाहा बना दिया।[1]
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1. (6-8) भावार्थ यह है कि इन्सान की पैदाइश में अल्लाह की शक्ति, दक्ष्ता तथा दया के जो लक्षण हैं, उन के दर्पण में यह बताया गया है कि प्रलय को असंभव न समझो। यह सब व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि तुम्हारा अस्तित्व व्यर्थ नहीं है कि मनमानी करो। (देखियेः तर्जुमानुल क़ुर्आन, मौलाना अबुला कलाम आज़ाद) इस का अर्थ यह भी हो सकता है कि जब तुम्हारा अस्तित्व और रूप रेखा कुछ भी तुम्हारे बस नहीं, तो फिर जिस शक्ति ने सब किया उसी की शक्ति में प्रलय तथा प्रतिकार के होने को क्यों नहीं मानते?
82:9जुज़ 30 · पृ. 587

كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِالدِّينِ9

वास्तव में तुम प्रतिफल (प्रलय) के दिन को नहीं मानते।
82:10जुज़ 30 · पृ. 587

وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَافِظِينَ10

जबकि तुमपर निरीक्षक (पासबान) हैं।
82:11जुज़ 30 · पृ. 587

كِرَامًا كَاتِبِينَ11

जो माननीय लेखक हैं।
82:12जुज़ 30 · पृ. 587

يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ12

वे जो कुछ तुम करते हो, जानते हैं।[1]
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1. (9-12) इन आयतों में इस भ्रम का खण्डन किया गया है कि सभी कर्मों और कथनों का ज्ञान कैसे हो सकता है।
82:13जुज़ 30 · पृ. 587

إِنَّ الْأَبْرَارَ لَفِي نَعِيمٍ13

निःसंदेह, सदाचारी सुखों में होंगे।
82:14जुज़ 30 · पृ. 587

وَإِنَّ الْفُجَّارَ لَفِي جَحِيمٍ14

और दुराचारी नरक में।
82:15जुज़ 30 · पृ. 587

يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ15

प्रतिकार (बदले) के दिन उसमें झोंक दिये जायेंगे।
82:16जुज़ 30 · पृ. 587

وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ16

और वे उससे बच रहने वाले नहीं।[1]
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1. (13-16) इन आयतों में सदाचारियों तथा दुराचारियों का परिणाम बताया गया है कि एक स्वर्ग के सुखों में रहेगा और दूसरा नरक के दण्ड का भागी बनेगा।
82:17जुज़ 30 · पृ. 587

وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ17

और तुम क्या जानो कि बदले का दिन क्या है?
82:18जुज़ 30 · पृ. 587

ثُمَّ مَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ18

फिर तुम क्या जानो कि बदले का दिन क्या है?
82:19जुज़ 30 · पृ. 587

يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِنَفْسٍ شَيْئًا ۖ وَالْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِلَّهِ19

जिस दिन किसी का किसी के लिए कोई अधिकार नहीं होगा और उस दिन सब अधिकार अल्लाह का होगा।[1]
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1. (17-19) इन आयतों में दो वाक्यों में प्रलय की चर्चा दोहरा कर उस की भ्यानकता को दर्शाते हुये बताया गया है कि निर्णय बे लाग होगा। कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा। सत्य आस्था और सत्कर्म ही सहायक होंगे जिस का मार्ग क़ुर्आन दिखा रहा है। क़ुर्आन की सभी आयतों में प्रतिकार का दिन प्रलय के दिन को ही बताया गया है जिस दिन प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मानुसार प्रतिकार मिलेगा।

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