सूरह 82 · जुज़ 30
Al-Infitar · 82:12
يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ
वे जो कुछ तुम करते हो, जानते हैं।[1]
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1. (9-12) इन आयतों में इस भ्रम का खण्डन किया गया है कि सभी कर्मों और कथनों का ज्ञान कैसे हो सकता है।
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1. (9-12) इन आयतों में इस भ्रम का खण्डन किया गया है कि सभी कर्मों और कथनों का ज्ञान कैसे हो सकता है।
तफ़सीर
तुम जो कार्य भी करते हो, वे उसे जानते हैं। इसलिए वे उसे लिख लेते हैं।
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