सूरह 85 · जुज़ 30
Al-Buruj · 85:22
فِي لَوْحٍ مَحْفُوظٍ
जो लेखपत्र (लौह़े मह़फ़ूज़) में सुरक्षित है।[1]
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1. (21-22) इन आयतों में बताया गया है कि यह क़ुर्आन कविता और ज्योतिष नहीं है जैसा कि वह सोचते हैं, यह श्रेष्ठ और उच्चतम अल्लाह का कथन है जिस का उद्गम "लौह़े मह़फ़ूज़" में सुरक्षित है।
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1. (21-22) इन आयतों में बताया गया है कि यह क़ुर्आन कविता और ज्योतिष नहीं है जैसा कि वह सोचते हैं, यह श्रेष्ठ और उच्चतम अल्लाह का कथन है जिस का उद्गम "लौह़े मह़फ़ूज़" में सुरक्षित है।
तफ़सीर
वह ऐसी तख्ती में अंकित है, जो परिवर्तन, विरूपण, कमी और वृद्धि से संरक्षित है।
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