सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:185

أَوَلَمْ يَنْظُرُوا فِي مَلَكُوتِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ مِنْ شَيْءٍ وَأَنْ عَسَىٰ أَنْ يَكُونَ قَدِ اقْتَرَبَ أَجَلُهُمْ ۖ فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَهُ يُؤْمِنُونَ

क्या उन्होंने आकाशों तथा धरती के राज्य को और जो कुछ अल्लाह ने पैदा किया है, उसे नहीं देखा[1]? और (येभी नहीं सोचा कि) हो सकता है कि उनका (निर्धारित) समय समीप आ गया हो? तो फिर इस (क़ुर्आन) के पश्चात् वह किस बात पर ईमान लायेंगे?
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1. अर्थात यदि यह विचार करें, तो इस पूरे विश्व की व्यवस्था और उस का एक-एक कण अल्लाह के अस्तित्व और उस के गुणों का प्रमाण है। और उसी ने मानव जीवन की व्यवस्था के लिये नबियों को भेजा है।

तफ़सीर

क्या इन लोगों ने आकाशों तथा धरती में अल्लाह के राज्य को शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से नहीं देखा? और उन दोनों के अंदर अल्लाह ने जो जीव और निर्जीव चीज़ें पैदा की हैं, उनपर निगाह नहीं डाली? और अपने निर्धारित समय (आयु) पर ग़ौर नहीं किया, जिसका अंत हो सकता है बहुत निकट हो, इसलिए समय निकलने से पहले तौबा कर लेते? जब वे क़ुरआन और उसके वादों और धमकियों पर ईमान नहीं लाए, तो उसके अलावा किस किताब पर ईमान लाएँगे?

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