सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:184

أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا ۗ مَا بِصَاحِبِهِمْ مِنْ جِنَّةٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ مُبِينٌ

और क्या उन्होंने ये नहीं सोचा कि उनका साथी[1] तनिक भी पागल नहीं है? वह तो केवल खुले रूप से सचेत करने वाला है।
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1. साथी से अभिप्राय मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, जिन को नबी होने से पहले वही लोग "अमीन" कहते थे।

तफ़सीर

और क्या अल्लाह की आयतों और उसके रसूल को झुठलाने वाले इन लोगों ने अपनी बुद्धि को काम में लाते हुए ग़ौर नहीं किया कि उनके लिए यह स्पष्ट हो जाता कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पागल नहीं हैं। वह तो केवल अल्लाह के रसूल हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी यातना से खुले रूप से सावधान करने के लिए भेजा है।

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