सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:179

وَلَقَدْ ذَرَأْنَا لِجَهَنَّمَ كَثِيرًا مِنَ الْجِنِّ وَالْإِنْسِ ۖ لَهُمْ قُلُوبٌ لَا يَفْقَهُونَ بِهَا وَلَهُمْ أَعْيُنٌ لَا يُبْصِرُونَ بِهَا وَلَهُمْ آذَانٌ لَا يَسْمَعُونَ بِهَا ۚ أُولَٰئِكَ كَالْأَنْعَامِ بَلْ هُمْ أَضَلُّ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ

और बहुत-से जिन्न और मानव को हमने नरक के लिए पैदा किया है। उनके पास दिल हैं, जिनसे सोच-विचार नहीं करते, उनकी आँखें हैं, जिनसे[1] नहीं देखते और कान हैं, जिनसे नहीं सुनते। वे पशुओं के समान हैं; बल्कि उनसे भी अधिक कुपथ हैं, यही लोग अचेतना में पड़े हुए हैं।
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1. आयत का भावार्थ यह है कि सत्य को प्राप्त करने के दो ही साधन हैः ध्यान और ज्ञान। ध्यान यह है कि अल्लाह की दी हुयी विचार शक्ति से काम लिया जाये। और ज्ञान यह है कि इस विश्व की व्यवस्था को देखा जाये और नबियों द्वारा प्रस्तुत किये हुये सत्य को सुना जाये, और जो इन दोनों से वंचित हो वह अंधा बहरा है।

तफ़सीर

और हमने बहुत-से जिन्नों और इनसानों को जहन्नम के लिए पैदा किए हैं; क्योंकि हम जानते हैं कि वे जहन्नम वालों का काम करेंगे। उनके पास दिल हैं जिनके साथ वे अपने लाभ एवं नुक़सान को नहीं समझते, उनकी आँखें हैं जिनके साथ वे आत्माओं और क्षितिज में अल्लाह की निशानियाँ नहीं देखते कि उनसे शिक्षा ग्रहण करते, और उनके पास कान हैं, जिनसे वे अल्लाह की आयतों को नहीं सुनते कि वे उसमें जो कुछ है उसपर चिंतन करते। जो लोग इन गुणों से विशेषित हैं, वे बुद्धिहीन होने में जानवरों की तरह हैं, बल्कि वे जानवरों की तुलना में अधिक गुमराह हैं। यही लोग हैं जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान लाने से ग़फ़लत में पड़े हुए हैं।

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