सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:178

مَنْ يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَنْ يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ

जिसे अल्लाह सुपथ कर दे, वही सीधी राह पा सकता है और जिसे कुपथ कर दे,[1] तो वही लोग असफल हैं।
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1. क़ुर्आन ने बार-बार इस तथ्य को दुहराया है कि मार्गदर्शन के लिये सोच-विचार की आवश्यक्ता है। और जो लोग अल्लाह की दी हुई विचार शक्ति से काम नहीं लेते, वही सीधी राह नहीं पाते। यही अल्लाह के सुपथ और कुपथ करने का अर्थ है।

तफ़सीर

जिसे अल्लाह अपने सीधे मार्ग की ओर हिदायत की तौफ़ीक़ प्रदान कर दे, तो वही सही मायने में हिदायत पाने वाला है; और जिसे वह सीधे मार्ग से दूर कर दे, तो वही लोग हैं जो वास्तव में अपने हितों का नुक़सान करने वाले हैं, जो क़ियामत के दिन अपना और अपने परिवार का घाटा करेंगे। आगाह रहो! यही खुला हुआ घाटा है।

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