सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:180

وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي أَسْمَائِهِ ۚ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ

और अल्लाह ही के शुभ नाम हैं, अतः उसे उन्हीं के द्वारा पुकारो और उन्हें छोड़ दो, जो उसके नामों में परिवर्तन[1] करते हैं, उन्हें शीघ्र ही उनके कुकर्मों का कुफल दे दिया जायेगा।
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1. अर्थात उस के गौणिक नामों से अपनी मूर्तियों को पुकारते हैं। जैसे अज़ीज़ से "उज़्ज़ा" और इलाह से "लात" इत्यादि।

तफ़सीर

सबसे अच्छे नाम अल्लाह ही के हैं, जो उसकी महिमा और पूर्णता को इंगित करते हैं। अतः अल्लाह से कुछ माँगते समय उनको वसीला बनाओ और उनके ज़रिए अल्लाह की प्रशंसा करो, और उन लोगों को छोड़ दो, जो इन नामों के मामले में सही रास्ते से हट जाते हैं, इस प्रकार कि उन्हें अल्लाह के अलावा के लिए ठहरा देते हैं, या अल्लाह से उनको अलग कर देते हैं, या उनके अर्थ को विकृत करते हैं, या अल्लाह के अलावा को उनके समान (सदृश्य) ठहराते हैं। हम इन नामों के विषय में सही रास्ते से हटने वालों को जल्द ही उनके कर्मों के कारण दर्दनाक यातना देंगे।

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