सूरह 68 · जुज़ 29
Al-Qalam · 68:17
إِنَّا بَلَوْنَاهُمْ كَمَا بَلَوْنَا أَصْحَابَ الْجَنَّةِ إِذْ أَقْسَمُوا لَيَصْرِمُنَّهَا مُصْبِحِينَ
निःसंदेह, हमने उन्हें परीक्षा में डाला[1] है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था। जब उन्होंने शपथ ली कि अवश्य तोड़ लेंगे उसके फल भोर होते ही।
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1. अर्थात मक्का वालों को। इस लिये यदि वह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लायेंगे तो उन पर सफलता की राह खुलेगी। अन्यथा संसार और परलोक दोनों की यातना के भागी होंगे।
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1. अर्थात मक्का वालों को। इस लिये यदि वह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लायेंगे तो उन पर सफलता की राह खुलेगी। अन्यथा संसार और परलोक दोनों की यातना के भागी होंगे।
तफ़सीर
हमने इन मुश्रिकों का अकाल एवं भूख के साथ परीक्षण किया, जिस तरह हमने बाग़ वालों का परीक्षण किया, जब उन्होंने सुबह के समय उसके फलों को जल्दी से तोड़ लेने की क़सम खाई थी, ताकि किसी गरीब व्यक्ति को उनसे खाना न मिले।
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