सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:3
ذَٰلِكَ بِأَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا اتَّبَعُوا الْبَاطِلَ وَأَنَّ الَّذِينَ آمَنُوا اتَّبَعُوا الْحَقَّ مِنْ رَبِّهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ اللَّهُ لِلنَّاسِ أَمْثَالَهُمْ
ये इस कारण कि उन्होंने कुफ़्र किया और चले असत्य पर तथा जो ईमान लाये, वे चले सत्य पर अपने पालनहार की ओर से (आये हुए), इसी प्रकार, अल्लाह बता देता है लोगों को, उनकी सही दशायें।[1]
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1. यह सूरह बद्र के युध्द से पहले उतरी। जिस में मक्का के काफ़िरों के आक्रमण से अपने धर्म और प्राण तथा मान-मर्यादा की रक्षा के लिये युध्द करने की प्रेरणा तथा साहस और आवश्यक निर्देश दिये गये हैं।
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1. यह सूरह बद्र के युध्द से पहले उतरी। जिस में मक्का के काफ़िरों के आक्रमण से अपने धर्म और प्राण तथा मान-मर्यादा की रक्षा के लिये युध्द करने की प्रेरणा तथा साहस और आवश्यक निर्देश दिये गये हैं।
तफ़सीर
दोनों पक्षों के लिए यह उल्लिखित बदला इस कारण है कि अल्लाह का इनकार करने वालों ने असत्य का अनुसरण किया और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखने वालों ने अपने रब की ओर से सत्य का अनुसरण किया। अतः दोनों के प्रयासों में अंतर के कारण उनका बदला अलग-अलग था। जिस तरह अल्लाह ने दोनों पक्षों : मोमिनों के पक्ष और काफ़िरों के पक्ष के बारे में अपना निर्णय स्पष्ट किया, उसी तरह अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है, इसलिए हर एक को उसके सदृश से मिलाता है।
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