सूरह 47 · जुज़ 26

Muhammad · 47:4

فَإِذَا لَقِيتُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا فَضَرْبَ الرِّقَابِ حَتَّىٰ إِذَا أَثْخَنْتُمُوهُمْ فَشُدُّوا الْوَثَاقَ فَإِمَّا مَنًّا بَعْدُ وَإِمَّا فِدَاءً حَتَّىٰ تَضَعَ الْحَرْبُ أَوْزَارَهَا ۚ ذَٰلِكَ وَلَوْ يَشَاءُ اللَّهُ لَانْتَصَرَ مِنْهُمْ وَلَٰكِنْ لِيَبْلُوَ بَعْضَكُمْ بِبَعْضٍ ۗ وَالَّذِينَ قُتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَلَنْ يُضِلَّ أَعْمَالَهُمْ

तो जब (युध्द में) भिड़ जाओ काफ़िरों से, तो गर्दन उड़ाओ, यहाँ तक कि जब कुचल दो उन्हें, तो उन्हें दृढ़ता से बाँधो। फिर उसके बाद या तो उपकार करके छोड़ दो या अर्थदण्ड लेकर। यहाँ तक कि युध्द अपने हथियार रख दे।[1] ये आदेश है और यदि अल्लाह चाहता, तो स्वयं उनसे बदला ले लेता। किन्तु, (ये आदेश इसलिए दिया) ताकि तुम्हारी एक-दूसरे द्वारा परीक्षा ले और जो मार दिये गये अल्लाह की राह में, तो वह कदापि व्यर्थ नहीं करेगा उनके कर्मों को।
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1. इस्लाम से पहले युध्द के बंदियों को दास बना लिया जाता था किन्तु इस्लाम उन्हें उपकार कर के या अर्थ दणड ले कर मुक्त करने का आदेश देता है। इस आयत में यह संकेत हैं कि इस्लाम जिहाद की अनुमति दूसरों के आक्रमण से रक्षा के लिये देता है।

तफ़सीर

अतः जब (ऐ ईमान वालो!) तुम युद्धरत काफिरों से मिलो, तो अपनी तलवारों से उनकी गरदनें उड़ाओ और जब तक उन्हें अधिक से अधिक संख्या में क़त्ल करके उनकी शक्ति तोड़ न दो, उनसे लड़ाई जारी रखो। जब उनमें से बहुत से लोगों को क़त्ल कर चुको, तो कैदियों के बंधनों को कस लो। फिर उन्हें क़ैद करने के बाद हित की अपेक्षा के अनुसार तुम्हारे पास यह विकल्प है कि : उनपर उपकार करते हुए कुछ लिए बिना ही उन्हें रिहा कर दो, या उन्हें पैसे लेकर या किसी अन्य चीज़ के बदले में छोड़ दो। उनसे तब तक लड़ते रहो और उन्हें बंदी बनाते रहो, जब तक कि काफ़िरों के इस्लाम लाने या उनकी संधि के साथ युद्ध समाप्त न हो जाए। यह उपर्युक्त काफ़िरों द्वारा मोमिनों का परीक्षण, दिनों का परिवर्तन और उनमें से कुछ की दूसरों पर विजय, अल्लाह का हुक्म (फैसला) है। यदि अल्लाह बिना लड़ाई के काफ़िरों से बदला लेना चाहे, तो वह अवश्य उनसे बदला ले ले। लेकिन अल्लाह ने तुम्हें एक-दूसरे के द्वारा आज़माने के लिए जिहाद का कानून बनाया है। चुनाँचे वह उन लोगों की परीक्षा लेता है जो ईमान वालों में से लड़ते हैं और जो नहीं लड़ते हैं, तथा काफ़िर की मोमिन के द्वारा परीक्षा लेता है। क्योंकि यदि उसने किसी ईमान वाले को क़त्ल कर दिया, तो ईमान वाला जन्नत में जाएगा, लेकिन अगर किसी ईमान वाले ने उसे मार दिया, तो वह जहन्नम में जाएगा। और जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे गए, तो अल्लाह उनके कर्मों को कदापि व्यर्थ नहीं करेगा।

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