सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:21
طَاعَةٌ وَقَوْلٌ مَعْرُوفٌ ۚ فَإِذَا عَزَمَ الْأَمْرُ فَلَوْ صَدَقُوا اللَّهَ لَكَانَ خَيْرًا لَهُمْ
आज्ञा पालन तथा उचित बात बोलना। तो जब (युध्द का) आदेश निर्धारित हो गया, तो यदि वे अल्लाह के साथ सच्चे रहें, तो उनके लिए उत्तम है।
तफ़सीर
अल्लाह के आदेश का पालन करना और भली बात कहना, उनके लिए अच्छा है। फिर जब लड़ना अनिवार्य हो जाए और उसके बिना कोई चारा न हो, तो यदि वे अल्लाह पर अपने ईमान के प्रति और उसकी आज्ञाकारिता में सच्चे रहें, तो यह उनके लिए निफ़ाक़ और अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करने से बेहतर होगा।
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