सूरह 47 · जुज़ 26

Muhammad · 47:22

فَهَلْ عَسَيْتُمْ إِنْ تَوَلَّيْتُمْ أَنْ تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ وَتُقَطِّعُوا أَرْحَامَكُمْ

फिर यदि तुम विमुख[1] हो गये, तो दूर नहीं कि तुम उपद्रव करोगे धरती में तथा तोड़ेगे अपने रिश्तों (संबंधों) को।
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1. अर्थात अल्लाह तथा रसूल की आज्ञा का पालन करने से। इस आयत में संकेत है कि धरती में उपद्रव, तथा रक्तपात का कारण अल्लाह तथा उस के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा से विमुख होने का परिणाम है। ह़दीस में है कि जो रिश्ते (संबंध) को जोड़ेगा तो अल्लाह उस को (अपनी दया से) जोड़ेगा। और जो तोड़ेगा तो उसे (अपनी दया से) दूर करेगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4820)

तफ़सीर

यदि तुम अल्लाह पर ईमान लाने और उसकी आज्ञा मानने से दूर हो जाओ, तो तुम्हारी स्थिति पर यही प्रबल है कि तुम कुफ़्र और पापों के द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करोगे और रिश्तेदारी के बंधनों को तोड़ोगे; जैसा कि जाहिलिय्यत (इस्लाम से पूर्व) के समयकाल में तुम्हारी स्थिति थी।

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