सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:20
وَيَقُولُ الَّذِينَ آمَنُوا لَوْلَا نُزِّلَتْ سُورَةٌ ۖ فَإِذَا أُنْزِلَتْ سُورَةٌ مُحْكَمَةٌ وَذُكِرَ فِيهَا الْقِتَالُ ۙ رَأَيْتَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ يَنْظُرُونَ إِلَيْكَ نَظَرَ الْمَغْشِيِّ عَلَيْهِ مِنَ الْمَوْتِ ۖ فَأَوْلَىٰ لَهُمْ
तथा जो ईमान लाये, उन्होंने कहा कि क्यों नहीं उतारी जाती कोई सूरह (जिसमें युध्द का आदेश हो?) तो जब एक दृढ़ सूरह उतार दी गयी तथा उसमें वर्णन कर दिया गया युध्द का, तो आपने उन्हें देख लिया, जिनके दिलों में रोग (द्विधा) है कि वे आपकी ओर उसके समान देख रहे हैं, जो मौत के समय अचेत पड़ा हुआ हो। तो उनके लिए उत्तम है।
तफ़सीर
अल्लाह पर ईमान रखने वाले लोग (इस बात की कामना करते हुए कि अल्लाह अपने रसूल पर कोई सूरत उतारे, जिसमें लड़ाई के हुक्म का उल्लेख हो) कहते हैं : अल्लाह ने कोई सूरत क्यों नहीं उतारी, जिसमें युद्ध का उल्लेख हो? फिर जब अल्लाह युद्ध के उल्लेख पर आधारित अपनी व्याख्या और नियमों में अच्छी तरह से स्पष्ट कोई सूरत उतारता है, तो (ऐ रसूल!) आप उन मुनाफ़िक़ों को देखते हैं, जिनके दिलों में संदेह है, कि वे आपकी ओर उस व्यक्ति की तरह देखते हैं, जिसपर भय और डर की गंभीरता से बेहोशी छा गई हो। तो अल्लाह ने ऐसे लोगों को धमकी दी है कि उनके लड़ाई से पीछे हटने और उससे भय खाने के कारण उनकी यातना निकट आ चुकी है।
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