सूरह 4 · जुज़ 5

An-Nisa · 4:147

مَا يَفْعَلُ اللَّهُ بِعَذَابِكُمْ إِنْ شَكَرْتُمْ وَآمَنْتُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ شَاكِرًا عَلِيمًا

अल्लाह को क्या पड़ी है कि तुम्हें यातना दे, यदि तुम कृतज्ञ रहो तथा ईमान रखो और अल्लाह[1] बड़ा गुणग्राही अति ज्ञानी है।
____________________
1. इस आयत में यह संकेत है कि अल्लाह, कुफल और सुफल मानव कर्म के परिणाम स्वरूप देता है। जो उस के निर्धारित किये हुये नियम का परिणाम होता है। जिस प्रकार संसार की प्रत्येक चीज़ का एक प्रभाव होता है, ऐसे ही मानव के प्रत्येक कर्म का भी एक प्रभाव होता है।

तफ़सीर

यदि तुम अल्लाह के आभारी बनो और उसपर ईमान रखो, तो उसे तुम्हें यातना देने की कोई ज़रूरत नहीं है। क्योंकि वह सर्वशक्तिमान बड़ा उपकारी अत्यंत दयावान है। वह तुम्हें केवल तुम्हारे गुनाहों के कारण यातना देता है। यदि तुमने अपने कार्य सुधार लिए, अल्लाह के प्रति उसकी नेमतों पर आभार प्रकट करते रहे और प्रत्यक्ष एवं प्रोक्ष रूप से उसपर ईमान लाए, तो वह तुम्हें हरगिज़ यातना नहीं देगा। अल्लाह उन लोगों का क़द्रदान (गुणग्राहक) है जिन्होंने उसकी नेमतों को स्वीकार किया, चुनाँचे वह उन्हें उसपर भरपूर बदला प्रदान करेगा। वह अपने बंदों के ईमान से अवगत है और हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें