सूरह 4 · जुज़ 6
An-Nisa · 4:148
۞ لَا يُحِبُّ اللَّهُ الْجَهْرَ بِالسُّوءِ مِنَ الْقَوْلِ إِلَّا مَنْ ظُلِمَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ سَمِيعًا عَلِيمًا
अल्लाह को अपशब्द (बुरी बात) की चर्चा नहीं भाती, परन्तु जिसपर अत्याचार किया गया[1] हो और अल्लाह सब सुनता और जानता है।
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1. आयत में कहा गया है कि किसी व्यक्ति में कोई बुराई हो तो उस की चर्चा न करते फिरो। परन्तु उत्पीड़ित व्यक्ति अत्याचारी के अत्याचार की चर्चा कर सकता है।
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1. आयत में कहा गया है कि किसी व्यक्ति में कोई बुराई हो तो उस की चर्चा न करते फिरो। परन्तु उत्पीड़ित व्यक्ति अत्याचारी के अत्याचार की चर्चा कर सकता है।
तफ़सीर
अल्लाह बुरी बात के साथ आवाज़ ऊँची करना पसंद नहीं करता, बल्कि उसे नापसंद करता और उस पर सज़ा की धमकी देता है। परंतु जिसपर अत्याचार हुआ हो, उसे अपने उत्पीड़क के बारे में शिकायत करने, उसपर बद्-दुआ करने और उससे उसी के समान शब्दों के साथ बदला लेने के लिए, बुरी बात के साथ आवाज़ ऊँची करने की अनुमति है। लेकिन उत्पीड़ित का धैर्य से काम लेना, बुरी बात के साथ आवाज़ बुलंद करने से बेहतर है। अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे इरादों को जानने वाला है। इसलिए बुरे शब्दों या इरादों से सावधान रहो।
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