सूरह 34 · जुज़ 22

Saba · 34:53

وَقَدْ كَفَرُوا بِهِ مِنْ قَبْلُ ۖ وَيَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ مِنْ مَكَانٍ بَعِيدٍ

जबकि उन्होंने कुफ़्र कर दिया पहले उसके साथ और तीर मारते रहे बिन देखे, दूर[1] से।
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1. अर्थात अपने अनुमान से असत्य बातें करते रहे।

तफ़सीर

और अब उनका ईमान लाना कैसे सही हो सकता तथा उसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है, जबकि वे सांसारिक जीवन में इसका इनकार कर चुके हैं, और सत्य को पहुँचने से दूर गुमान के आधार पर अटकल बातें करते रहे हैं, जैसा कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में उनका यह कहना कि : वह जादूगर, काहिन और कवि हैं?!

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