सूरह 34 · जुज़ 22
Saba · 34:21
وَمَا كَانَ لَهُ عَلَيْهِمْ مِنْ سُلْطَانٍ إِلَّا لِنَعْلَمَ مَنْ يُؤْمِنُ بِالْآخِرَةِ مِمَّنْ هُوَ مِنْهَا فِي شَكٍّ ۗ وَرَبُّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ
और नहीं था उसका उनपर कुछ अधिकार (दबाव), किन्तु, ताकि हम जान लें कि कौन ईमान रखता है आख़िरत (परलोक) पर उनमें से, जो उसके विषय में किसी संदेह में हैं तथा आपका पालनहार प्रत्येक चीज़ का निरीक्षक है।[1]
____________________
1. ताकि उन का प्रतिकार (बदला) दे।
____________________
1. ताकि उन का प्रतिकार (बदला) दे।
तफ़सीर
इबलीस के पास उन पर कोई शक्ति नहीं थी जिससे वह उन्हें गुमराह होने पर विवश कर सके। वह तो केवल उनके लिए (गुमराही को) सुशोभित कर रहा था और उन्हें बहका रहा था। परंतु हमने उसे उन लोगों को बहकाने की अनुमति दी, ताकि उस व्यक्ति की बात ज़ाहिर हो जाए जो आख़िरत तथा उसमें मिलने वाले बदले पर ईमान रखता है और जो उसके बारे में संदेह में पड़ा है। तथा (ऐ रसूल!) आपका पालनहार प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है। वह अपने बंदों के कामों को सुरक्षित रखता है और उन्हें उनका बदला देता है।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें