सूरह 30 · जुज़ 21

Ar-Rum · 30:47

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَانْتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ

और हमने भेजा आपसे पहले रसूलों को, उनकी जातियों की ओर। तो वे लाये उनके पास खुली निशानियाँ, अन्ततः, हमने बदला ले लिया उनसे, जिन्होंने अपराध किया और अनिवार्य था हमपर ईमान वालों की सहायता[1] करना।
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1. आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) तथा आप के अनुयायियों को सांत्वना दी जा रही है।

तफ़सीर

निश्चित रूप से हमने (ऐ रसूल) आपसे पहले कई रसूल उनकी जातियों की ओर भेजे।चुनाँचे वे उनके पास अपनी सच्चाई को दर्शाने वाले प्रमाणों और तर्कों के साथ आए। परंतु उन्होंने उसको झुठला दिया जो उनके रसूल उनके पाल लेकर आए थे। इसलिए हमने बुराई करने वालों से बदला लिया और उन्हें अपनी यातना से विनष्ट कर दिया, जबकि हमने रसूलों और उनपर विश्वास रखने वालों को विनाश से बचा लिया। मोमिनों को बचाना और उनकी मदद करना, एक अधिकार है जो हमने अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है।

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