सूरह 13 · जुज़ 13

Ar-Ra'd · 13:37

وَكَذَٰلِكَ أَنْزَلْنَاهُ حُكْمًا عَرَبِيًّا ۚ وَلَئِنِ اتَّبَعْتَ أَهْوَاءَهُمْ بَعْدَمَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ مَا لَكَ مِنَ اللَّهِ مِنْ وَلِيٍّ وَلَا وَاقٍ

और इसी प्रकार, हमने इसे अरबी आदेश के रूप में उतारा है[1] और यदि आप उनकी आकांक्षाओं का अनुसरण करेंगे, इसके पश्चात् कि आपके पास ज्ञान आ गया, तो अल्लाह से आपका कोई सहायक और रक्षक न होगा।
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1. ताकि वह बहाना न करें कि हम क़ुर्आन को समझ नहीं सके, इस लिये कि सारे नबियों पर जो पुस्तकें उतरीं वह उन्हीं की भाषाओं में थीं।

तफ़सीर

और जैसे हमने पिछली पुस्तकों को उनके समुदायों की भाषा में उतारा था, उसी प्रकार हमने (ऐ रसूल!) आपपर क़ुरआन को अरबी भाषा में सच्चाई को स्पष्ट करने वाला एक निर्णायक फ़रमान बनाकर उतारा है। और यदि (ऐ रसूल!) आपने अपने पास उस ज्ञान के आ जाने के पश्चात जो अल्लाह ने आपको सिखाया है, किताब वालों की इच्छाओं का पालन किया उनके उस चीज़ को हटाने की सौदेबाज़ी में जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाती, तो अल्लाह के मुक़ाबले में आपका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो आपके मामले को संभाले और आपके दुश्मनों के खिलाफ़ आपकी सहायता करे, और न ही आपको अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला होगा।

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