सूरह 13 · जुज़ 13
Ar-Ra'd · 13:38
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًا مِنْ قَبْلِكَ وَجَعَلْنَا لَهُمْ أَزْوَاجًا وَذُرِّيَّةً ۚ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَنْ يَأْتِيَ بِآيَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ لِكُلِّ أَجَلٍ كِتَابٌ
और हमने आपसे पहले बहुत-से रसूलों को भेजा है और उनकी पत्नियाँ तथा बाल-बच्चे[1] बनाये। किसी रसूल के बस में नहीं है कि अल्लाह की अनुमति बिना कोई निशानी ले आये और हर वचन के लिए एक निर्धारित समय है[2]।
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1. अर्थात वह मनुष्य थे, नूर या फ़रिश्ते नहीं। 2. अर्थात अल्लाह का वादा अपने समय पर पूरा हो कर रहेगा। उस में देर-सवेर नहीं होगी।
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1. अर्थात वह मनुष्य थे, नूर या फ़रिश्ते नहीं। 2. अर्थात अल्लाह का वादा अपने समय पर पूरा हो कर रहेगा। उस में देर-सवेर नहीं होगी।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले रसूलों को मनुष्यों ही में से भेजे। इसलिए आप (दूसरे) रसूलों से अलग कोई (अनोखे) रसूल नहीं हैं। तथा हमने अन्य सभी मनुष्यों की तरह उनके लिए पत्नियाँ और बच्चे बनाए। हमने उन्हें फ़िरिश्ते नहीं बनाए,जो न शादी करते हैं और न बच्चे जनते हैं। और आप भी उन्हीं रसूलों में से हैं, जो मनुष्य थे, शादी-ब्याह करते थे और बच्चे पैदा करते थे, तो फिर आपके ऐसा होने पर इन मुश्रिकों को आश्चर्य क्यों होता है?! तथा किसी रसूल के बस की बात नहीं है कि अल्लाह की अनुमति के बिना अपनी ओर से कोई निशानी ले आए। हर मामले के लिए जिसका अल्लाह ने फ़ैसला किया है एक किताब है, जिसमें वह उल्लिखित है और उसका एक निर्धारित समय है, जो आगे-पीछे नहीं हो सकता।
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