सूरह 96 · जुज़ 30
Al-Alaq · 96:19
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَاسْجُدْ وَاقْتَرِبْ ۩
(हे भक्त) कदापि उसकी बात न सुनो तथा सज्दा करो और मेरे समीप हो जाओ।[1]
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1. (19) इस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आप के माध्यम से साधारण मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि सहनशीलता के साथ किसी धमकी पर ध्यान न देते हुये नमाज़ अदा करते रहो ताकि इस के द्वारा तुम अल्लाह के समीप हो जाओ।
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1. (19) इस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आप के माध्यम से साधारण मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि सहनशीलता के साथ किसी धमकी पर ध्यान न देते हुये नमाज़ अदा करते रहो ताकि इस के द्वारा तुम अल्लाह के समीप हो जाओ।
तफ़सीर
मामला वैसा नहीं है, जैसा इस ज़ालिम ने समझ रखा है कि वह आपको कोई नुक़सान पहुँचा सकता है। अतः आप उसके किसी आदेश या निषेध को न मानें, बल्कि अल्लाह को सजदा करें और आज्ञाकारिता के कार्यों के द्वारा उसके निकट हो जाएँ, क्योंकि वे उससे निकट कर देती हैं।
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