सूरह 85 · जुज़ 30
Al-Buruj · 85:11
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْكَبِيرُ
वास्तव में, जो ईमान लाये और सदाचार बने, उनके लिए ऐसे स्वर्ग हैं, जिनके तले नहरें बह रही हैं और यही बड़ी सफलता है।[1]
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1. (5-11) इन आयतों में जो आस्तिक सताये गये उन के लिये सहायता का वचन तथा यदि वे अपने विश्वास (ईमान) पर स्थित रहे तो उन के लिये स्वर्ग की शुभ सूचना और अत्याचारियों के लिये नरक की धमकी है जिन्होंने उन को सताया और फिर अल्लाह से क्षमा याचना आदि कर के सत्य को नहीं माना।
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1. (5-11) इन आयतों में जो आस्तिक सताये गये उन के लिये सहायता का वचन तथा यदि वे अपने विश्वास (ईमान) पर स्थित रहे तो उन के लिये स्वर्ग की शुभ सूचना और अत्याचारियों के लिये नरक की धमकी है जिन्होंने उन को सताया और फिर अल्लाह से क्षमा याचना आदि कर के सत्य को नहीं माना।
तफ़सीर
निश्चय जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों एवं पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। यह बदला, जो उनके लिए तैयार किया गया है, यही बहुत बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई अन्य सफलता नहीं हो सकती।
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