सूरह 74 · जुज़ 29
Al-Muddaththir · 74:53
كَلَّا ۖ بَلْ لَا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ
कदापि ये नहीं (हो सकता) बल्कि वे आख़िरत (परलोक) से नहीं डरते हैं।
तफ़सीर
मामला यह नहीं है। बल्कि उनके गुमराही में में बने रहने का कारण यह है कि वे आख़िरत की यातना पर ईमान नहीं रखते हैं। इसलिए वे अपने कुफ़्र पर बने हुए हैं।
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