सूरह 74 · जुज़ 29
Al-Muddaththir · 74:52
بَلْ يُرِيدُ كُلُّ امْرِئٍ مِنْهُمْ أَنْ يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُنَشَّرَةً
बल्कि चाहता है प्रत्येक व्यक्ति उनमें से कि उसे खुली[1] पुस्तक दी जाये।
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1. अर्थात वे चाहते हैं कि प्रत्येक के ऊपर वैसे ही पुस्तक उतारी जाये जैसे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारी गई है। तब वे ईमान लायेंगे। (इब्ने कसीर)
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1. अर्थात वे चाहते हैं कि प्रत्येक के ऊपर वैसे ही पुस्तक उतारी जाये जैसे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारी गई है। तब वे ईमान लायेंगे। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
बल्कि इन मुश्रिकों में से हर व्यक्ति चाहता है कि उसके सिर के पास एक खुली किताब हो, जो उसे बताए कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं। और इसका कारण प्रमाणों की कमी या तर्कों का कमज़ोर होना नहीं है, बल्कि इसका कारण हठ और घमंड है।
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