सूरह 74 · जुज़ 29
Al-Muddaththir · 74:32
كَلَّا وَالْقَمَرِ
ऐसी बात नहीं, शपथ है चाँद की!
तफ़सीर
बात वैसी नहीं है, जैसा कि कुछ मुश्रिकों ने दावा किया है कि उसके साथी जहन्नम की रक्षा पर नियुक्त फ़रिश्तों का काम तमाम करने के पर्याप्त हैं। अल्लाह ने चाँद की क़सम खाई है।
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