सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:59
لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُمْ مِنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
हमने नूह़[1] को उसकी जाति की ओर (अपना संदेश पहुँचाने के लिए) भेजा था, तो उसने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! (केवल) अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
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1. बताया जाता है कि नूह़ अलैहिस्सलाम प्रथम मनु आदम (अलैहिस्स्लाम) के दसवें वंश में थे। उन के कुछ पहले तक लोग इस्लाम पर चले आ रहे थे। फिर अपने धर्म से फिर गये अपने पुनीत पूर्वजों की मुर्तियाँ बना कर पूजने लगे। तब अल्लाह ने नूह़ को भेजा। किन्तु कुछ के सिवा किसी ने उन की बात नहीं मानी। अन्ततः सब डुबो दिये गये। फिर नूह़ के तीन पुत्रों से मानव वंश चला। इसी लिये उन को दूसरा आदम भी कहा जाता है। (देखियेः सूरह नूह़, आयतः71)
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1. बताया जाता है कि नूह़ अलैहिस्सलाम प्रथम मनु आदम (अलैहिस्स्लाम) के दसवें वंश में थे। उन के कुछ पहले तक लोग इस्लाम पर चले आ रहे थे। फिर अपने धर्म से फिर गये अपने पुनीत पूर्वजों की मुर्तियाँ बना कर पूजने लगे। तब अल्लाह ने नूह़ को भेजा। किन्तु कुछ के सिवा किसी ने उन की बात नहीं मानी। अन्ततः सब डुबो दिये गये। फिर नूह़ के तीन पुत्रों से मानव वंश चला। इसी लिये उन को दूसरा आदम भी कहा जाता है। (देखियेः सूरह नूह़, आयतः71)
तफ़सीर
निःसंदेह हमने नूह को उनकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा, जो उन्हें अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसके अलावा की पूजा छोड़ने के लिए बुला रहे थे। चुनाँचे उन्होंने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो, क्योंकि उसके सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं है। निश्चय मुझे तुमपर एक महान दिन की यातना का डर है, यदि तुम अपने कुफ़्र पर अड़े रहे।
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