सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:58
وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَالَّذِي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِدًا ۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ
और स्वच्छ भूमि अपनी उपज अल्लाह की अनुमति से भरपूर देती है तथा खराब भूमि की उपज थोड़ी ही होती है। इसी प्रकार, हम अपनी[1] आयतें (निशानियाँ) उनके लिए दुहराते हैं, जो शुक्र अदा करते हैं।
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1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मुझे अल्लाह ने जिस मार्गदर्शन और ज्ञान के साथ भेजा है, वह उस वर्षा के समान है, जो किसी भूमि में हुई। तो उस का कुछ भाग अच्छा था जिस ने पानी लिया और उस से बहुत सी घास और चारा उगाया। और कुछ कड़ा था जिस ने पानी रोक लिया तो लोगों को लाभ हुआ और उस से पिया और सींचा। और कुछ चिकना था, जिस ने न पानी रोका न घास उपजाई। तो यही उस की दशा है जिस ने अल्लाह के धर्म को समझा और उसे सीखा तथा सिखाया। और उस की जिस ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया और न अल्लाह के मार्गदर्शन को स्वीकार किया, जिस के साथ मुधे भेजा गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः79)
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1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मुझे अल्लाह ने जिस मार्गदर्शन और ज्ञान के साथ भेजा है, वह उस वर्षा के समान है, जो किसी भूमि में हुई। तो उस का कुछ भाग अच्छा था जिस ने पानी लिया और उस से बहुत सी घास और चारा उगाया। और कुछ कड़ा था जिस ने पानी रोक लिया तो लोगों को लाभ हुआ और उस से पिया और सींचा। और कुछ चिकना था, जिस ने न पानी रोका न घास उपजाई। तो यही उस की दशा है जिस ने अल्लाह के धर्म को समझा और उसे सीखा तथा सिखाया। और उस की जिस ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया और न अल्लाह के मार्गदर्शन को स्वीकार किया, जिस के साथ मुधे भेजा गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः79)
तफ़सीर
अच्छी भूमि अल्लाह की अनुमति से अपने पौधे अच्छे और पूर्ण रूप से निकालती है। यही हाल ईमान वाले का है, वह उपदेश को सुनता और उससे लाभ उठाता है, जिसके परिणामस्वरूप वह अच्छे कार्य करता है। जबकि दलदली और खारी भूमि अपना पौधा कठिनाई से निकालती है, जिसमें कोई अच्छाई नहीं होती। यही हाल काफ़िर का है, वह उपदेशों से लाभ नहीं उठाता है, इसलिए उसके परिणामस्वरूप वह नेक कार्य नहीं करता है, जिससे उसे लाभ प्राप्त हो। इस अद्भुत विविधीकरण की तरह, हम उन लोगों के लिए सत्य को साबित करने के लिए प्रमाणों और तर्कों में विविधता लाते हैं, जो अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करते हैं। इसलिए वे उनकी नाशुक्री नहीं करते हैं, और अपने रब की आज्ञा का पालन करते हैं।
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