सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:163

وَاسْأَلْهُمْ عَنِ الْقَرْيَةِ الَّتِي كَانَتْ حَاضِرَةَ الْبَحْرِ إِذْ يَعْدُونَ فِي السَّبْتِ إِذْ تَأْتِيهِمْ حِيتَانُهُمْ يَوْمَ سَبْتِهِمْ شُرَّعًا وَيَوْمَ لَا يَسْبِتُونَ ۙ لَا تَأْتِيهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ نَبْلُوهُمْ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ

तथा (हे नबी!) इनसे उस नगरी के सम्बंध में प्रश्न करो, जो समुद्र (लाल सागर) के समीप थी, जब उसके निवासी सब्त (शनिवार) के दिन के विषय में आज्ञा का उल्लंघन[1] कर रहे थे, जब उनके पास उनकी मछलियाँ सब्त के दिन पानी के ऊपर तैरकर आ जाती थीं और सब्त का दिन न हो, तो नहीं आती थीं। इसी प्रकार, उनकी अवज्ञा के कारण हम उनकी परीक्षा ले रहे थे।
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1. क्यों कि उन के लिये यह आदेश था कि शनिवार को मछलियों का शिकार नहीं करेंगे। अधिकांश भाष्यकारों ने उस नगरी का नाम ईला (ईलात) बताया है, जो क़ुल्ज़ुम सागर के किनारे पर आबाद थी।

तफ़सीर

तथा (ऐ रसूल!) इन यहूदियों को वह सज़ा याद दिलाने के लिए, जिसके साथ अल्लाह ने उनके पूर्वजों को दंडित किया था, उनसे उस बस्ती की कहानी पूछिए, जो समुद्र के निकट थी, जब उसके निवासी मनाही के बावजूद शनिवार के दिन शिकार करके अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन कर रहे थे। जब अल्लाह ने उनका इस तरह परीक्षण किया कि शनिवार के दिन मछलियाँ समुद्र की सतह पर प्रत्यक्ष होकर उनके पास आने लगीं, जबकि अन्य दिनों में वे उनके पास नहीं आती थीं। अल्लाह ने उन्हें इस प्रकार की परीक्षा में इसलिए डाला कि वे अल्लाह के आज्ञापालन के दायरे से निकल गए थे और गुनाह करने लगे थे। चुनाँचे उन्होंने मछलियों का शिकार करने के लिए यह चाल चली कि उन्होंने जाल लगा दिए और गड्ढे खोद लिए। इस तरह शनिवार के दिन मछलियाँ उन जालों फँस जाती थीं और गड्ढों में गिर जाती थीं। फिर वे रविवार के दिन उन्हें पकड़कर खा जाते थे।

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