सूरह 7 · जुज़ 9
Al-A'raf · 7:162
فَبَدَّلَ الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ قَوْلًا غَيْرَ الَّذِي قِيلَ لَهُمْ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِجْزًا مِنَ السَّمَاءِ بِمَا كَانُوا يَظْلِمُونَ
तो उनमें से अत्याचारियों ने उस बात को, दूसरी बात से[1] बदल दिया, जो उनसे कही गयी थी। तो हमने उनपर आकाश से प्रकोप उतार दिया। क्योंकि वे अत्याचार कर रहे थे।
____________________
1. और चूतड़ों के बल खिसकते और यह कहते हुये प्रवेश किया कि गेहूँ मिले। (सह़ीह़ बुख़ारीः4641)
____________________
1. और चूतड़ों के बल खिसकते और यह कहते हुये प्रवेश किया कि गेहूँ मिले। (सह़ीह़ बुख़ारीः4641)
तफ़सीर
उनमें से अत्याचारियों ने, उस बात को बदल दिया जिसका उन्हें आदेश दिया गया था। चुनाँचे उन्होंने क्षमा का अनुरोध करने के बजाय "दाना बाली में" कहा। तथा उन्होंने उस कार्य को को भी बदल दिया जिसका उन्हें आदेश दिया गया था। चुनाँचे वे अल्लाह के लिए विनम्रता अपनाते हुए, अपने सिर को झुकाए हुए प्रवेश करने के बजाय अपनी पीठ के बल घिसटते हुए दाखिल हुए। अतः हमने उनके अत्याचार के कारण, उनपर आकाश से एक यातना भेज दी।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें