सूरह 68 · जुज़ 29
Al-Qalam · 68:10
وَلَا تُطِعْ كُلَّ حَلَّافٍ مَهِينٍ
और बात न मानें[1] आप किसी अधिक शपथ लेने वाले, हीन व्यक्ति की।
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1. इन आयतों में किसी विशेष काफ़िर की दशा का वर्णन नहीं बल्कि काफ़िरों के प्रमुखों के नैतिक पतन तथा कुविचारों और दुराचारों को बताया गया है जो लोगों को इस्लाम के विरुध्द उकसा रहे थे। तो फिर क्या इन की बात मानी जा सकती है?
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1. इन आयतों में किसी विशेष काफ़िर की दशा का वर्णन नहीं बल्कि काफ़िरों के प्रमुखों के नैतिक पतन तथा कुविचारों और दुराचारों को बताया गया है जो लोगों को इस्लाम के विरुध्द उकसा रहे थे। तो फिर क्या इन की बात मानी जा सकती है?
तफ़सीर
और आप हर ऐसे व्यक्ति की बात न मानें, जो बहुत ज़्यादा झूठी क़समें खाने वाला और तुच्छ है।
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