सूरह 67 · जुज़ 29

Al-Mulk · 67:5

وَلَقَدْ زَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِمَصَابِيحَ وَجَعَلْنَاهَا رُجُومًا لِلشَّيَاطِينِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابَ السَّعِيرِ

और हमने सजाया है संसार के आकाश को प्रदीपों (ग्रहों) से तथा बनाया है उन्हें (तारों को) मार भगाने का साधन शैतानों[1] को, और तैयार की है हमने उनके लिए दहकती अग्नि की यातना।
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1. जो चोरी से आकाश की बातें सुनते हैं। (देखियेः सूरह साफ़्फ़ात, आयतः7-10)

तफ़सीर

निश्चय हमने धरती से सबसे निकट के आकाश को चमकीले तारों के साथ सुशोभित किया है तथा हमने उन तारों को उल्का बना दिया है, जिनके द्वारा उन शैतानों को मारा जाता है, जो चोरी-छिपे सुनने का प्रयास करते हैं। तो ये तारे उन्हें जला देते हैं, और हमने उनके लिए आख़िरत में भड़कती आग तैयार कर रखी है।

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