सूरह 67 · जुज़ 29

Al-Mulk · 67:4

ثُمَّ ارْجِعِ الْبَصَرَ كَرَّتَيْنِ يَنْقَلِبْ إِلَيْكَ الْبَصَرُ خَاسِئًا وَهُوَ حَسِيرٌ

फिर बार-बार देखो, वापस आयेगी तुम्हारी ओर निगाह थक-हार कर।

तफ़सीर

फिर तुम बार-बार नज़र डालो, तुम्हारी नज़र आकाश की रचना में कोई दोष या खराबी देखे बिना अपमानित होकर तुम्हारी ओर लौट आएगी और वह थकी हुई होगी, उसे कुछ दिखाई न देगा।

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