सूरह 67 · जुज़ 29
Al-Mulk · 67:20
أَمَّنْ هَٰذَا الَّذِي هُوَ جُنْدٌ لَكُمْ يَنْصُرُكُمْ مِنْ دُونِ الرَّحْمَٰنِ ۚ إِنِ الْكَافِرُونَ إِلَّا فِي غُرُورٍ
कौन है वह तुम्हारी सेना जो तुम्हारी सहायता कर सकेगी अल्लाह के मुक़ाबले में? बल्कि वह घुस गये हैं अवैज्ञा तथा घृणा में।[1]
तफ़सीर
यदि (ऐ काफ़िरो) अल्लाह तुम्हें यातना देना चाहे, तो तुम्हारे लिए कोई सेना नहीं है, जो तुम्हें उसकी यातना से बचा सके। काफ़िर लोग तो मात्र धोखे में पड़े हुए हैं। शैतान ने उन्हें धोखा दिया, तो वे उसके धोखे में पड़ गए।
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