सूरह 67 · जुज़ 29
Al-Mulk · 67:13
وَأَسِرُّوا قَوْلَكُمْ أَوِ اجْهَرُوا بِهِ ۖ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
तुम चुपके बोलो अपनी बात अथवा ऊँचे स्वर में। वास्तव में वह भली-भाँति जानता है सीनों के भेदों को।
तफ़सीर
(ऐ लोगो) तुम अपनी बात छिपाओ या उसे प्रकट करो, अल्लाह उसे जानता है। निश्चय वह अपने बंदों के दिलों की बातों को भी जानता है, उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
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