सूरह 65 · जुज़ 28

At-Talaq · 65:7

لِيُنْفِقْ ذُو سَعَةٍ مِنْ سَعَتِهِ ۖ وَمَنْ قُدِرَ عَلَيْهِ رِزْقُهُ فَلْيُنْفِقْ مِمَّا آتَاهُ اللَّهُ ۚ لَا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفْسًا إِلَّا مَا آتَاهَا ۚ سَيَجْعَلُ اللَّهُ بَعْدَ عُسْرٍ يُسْرًا

चाहिये कि सम्पन्न, ख़र्च दे अपनी कमाई के अनुसार और तंग हो जिसपर उसकी जीविका, उसे चाहिये कि ख़र्च दे उसमें से, जो दिया है उसे अल्लाह ने। अल्लाह भार नहीं रखता किसी प्राणी पर, परन्तु उतना ही, जो उसे दिया है। शीघ्र ही कर देगा अल्लाह तंगी के पश्चात् सुविधा।

तफ़सीर

जिसे अल्लाह ने धन संपन्न बनाया है, उसे चाहिए अपनी संपन्नता के अनुसार अपनी तलाक़शुदा स्त्री और अपने बच्चे पर खर्च करे, और जिसकी रोज़ी तंग कर दी गई है, तो अल्लाह ने उसे जो कुछ भी दिया है, उसी में से खर्च करे। अल्लाह किसी प्राणी पर उतना ही भार डालता है, जितना उसे प्रदान किया है। उसपर उससे अधिक या उसकी शक्ति से बढ़कर भार नहीं डालता है। शीघ्र ही अल्लाह उसकी तंगहाली और कठिनाई के बाद संपन्नता और समृद्धि प्रदान करेगा।

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