सूरह 65 · जुज़ 28

At-Talaq · 65:3

وَيَرْزُقْهُ مِنْ حَيْثُ لَا يَحْتَسِبُ ۚ وَمَنْ يَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ فَهُوَ حَسْبُهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ بَالِغُ أَمْرِهِ ۚ قَدْ جَعَلَ اللَّهُ لِكُلِّ شَيْءٍ قَدْرًا

और उसे जीविका प्रदान करेगा, उस स्थान से, जिसका उसे अनुमान (भी) न हो तथा जो अल्लाह पर निर्भर रहेगा, तो वही उसे पर्याप्त है। निश्चय अल्लाह अपना कार्य पूरा करके रहेगा।[1] अल्लाह ने प्रत्येक वस्तु के लिए एक अनुमान (समय) नियत कर रखा है।
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1. अर्थात जो दुःख तथा सुख भाग्य में अल्लाह ने लिखा है वह अपने समय में अवश्य पूरा होगा।

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और उसे वहाँ से रोज़ी देगा, जहाँ से वह सोच भी नहीं सकता और वह उसके दिमाग में भी नहीं आया होगा। और जो अपने कामों में अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। निश्चय अल्लाह अपने आदेश को लागू करने वाला है। वह किसी चीज़ से विवश नहीं है और कोई चीज़ उससे नहीं छूटती। अल्लाह ने हर चीज़ का एक नियत समय निर्धारित कर रखा है, जहाँ तक उसे पहुँचना है। चुनाँचे कठिनाई का एक नियत समय निर्धारित है तथा समृद्धि का एक नियत समय निर्धारित है। अतः दोनों में से कोई भी इनसान पर हमेशा नहीं रहती।

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