सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:79
إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا ۖ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ
मैंने तो अपना मुख एकाग्र होकर, उसकी ओर कर लिया है, जिसने आकाशों तथा धरती की रचना की है और मैं मुश्रिकों में से नहीं[1] हूँ।
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1. इब्राहीम अलैहिस्सलाम उस युग में नबी हुये जब बाबिल तथा नेनवा के निवासी आकाशीय ग्रहों की पूजा कर रहे थे। परन्तु इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर अल्लाह ने सत्य की राह खोल दी। उन्हों ने इन आकाशीय ग्रहों पर विचार किया तथा उन को निकलते और फिर डूबते देख कर ये निर्णय लिया कि यह किसी की रचना तथा उस के अधीन हैं। और इन का रचयिता कोई और है। अतः रचित तथा रचना कभी पूज्य नहीं हो सकती, पूज्य वही हो सकता है जो इन सब का रचयिता तथा व्यवस्थापक है।
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1. इब्राहीम अलैहिस्सलाम उस युग में नबी हुये जब बाबिल तथा नेनवा के निवासी आकाशीय ग्रहों की पूजा कर रहे थे। परन्तु इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर अल्लाह ने सत्य की राह खोल दी। उन्हों ने इन आकाशीय ग्रहों पर विचार किया तथा उन को निकलते और फिर डूबते देख कर ये निर्णय लिया कि यह किसी की रचना तथा उस के अधीन हैं। और इन का रचयिता कोई और है। अतः रचित तथा रचना कभी पूज्य नहीं हो सकती, पूज्य वही हो सकता है जो इन सब का रचयिता तथा व्यवस्थापक है।
तफ़सीर
मैंने अपने धर्म (धार्मिकता) को उस अस्तित्व के लिए विशुद्ध कर दिया, जिसने बिना किसी पूर्व उदाहरण के आकाशों तथा धरती की रचना की है, शिर्क से विमुख होकर शुद्ध एकेश्वरवाद की ओर रुख करते हुए, तथा मैं उन बहुदेववादियों में से नहीं हूँ, जो अल्लाह के साथ उसके अलावा की पूजा करते हैं।
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