सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:63
قُلْ مَنْ يُنَجِّيكُمْ مِنْ ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ تَدْعُونَهُ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً لَئِنْ أَنْجَانَا مِنْ هَٰذِهِ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ
(हे नबी!) उनसे पूछिए कि थल तथा जल के अंधेरों में तुम्हें कौन बचाता है, जिसे तुम विनय पूर्वक और धीरे-धीरे पुकारते हो कि यदि उसने हमें बचा लिया, तो हम अवश्य कृतज्ञों में हो जायेंगे?
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से पूछें : तुम्हें थल और समुद्र के अँधेरों में मिलने वाले खतरों से कौन बचाता और छुटकारा देता है? तुम उसी अकेले को गिड़गिड़ाते हुए विनयपूर्वक गुप्त रूप से तथा खुले तौर पर पुकारते हो : यदि हमारा पालनहार हमें इन विपत्तियों से छुटकारा प्रदान कर दे, तो हम अवश्य अपने ऊपर उसकी नेमतों के लिए आभार प्रकट करते हुए उसके सिवा किसी और की पूजा नहीं करेंगे।
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