सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:60
وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُمْ بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ
वही है, जो रात्रि में तुम्हारी आत्माओं को ग्रहण कर लेता है तथा दिन में जो कुछ किया है, उसे जानता है। फिर तुम्हें उस (दिन) में जगा देता है, ताकि निर्धारित अवधि पूरी हो जाये[1]। फिर तुम्हें उसी की ओर प्रत्यागत (वापस) होना है। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों से सूचित कर देगा।
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1. अर्थात संसारिक जीवन की निर्धारित अवधि।
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1. अर्थात संसारिक जीवन की निर्धारित अवधि।
तफ़सीर
अल्लाह ही है जो सोते समय तुम्हारी आत्माओं को अस्थायी रूप से क़ब्ज़ कर लेता है, और वह जानता है कि तुमने दिन के दौरान अपनी सक्रियता के समय क्या कमाया है। फिर वह सोते समय तुम्हारी आत्माओं को क़ब्ज़ करने के बाद दिन में तुम्हें उठा देता है ताकि तुम अपने काम कर सको, यहाँ तक कि अल्लाह के यहाँ तुम्हारे जीवन की निर्धारित अवधि समाप्त हो जाएगी। फिर क़ियामत के दिन पुनः जीवित किए जाने के उपरांत तुम्हें उसी अकेले की ओर लौटना है। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम अपने दुनिया के जीवन में किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।
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