सूरह 6 · जुज़ 8

Al-An'am · 6:136

وَجَعَلُوا لِلَّهِ مِمَّا ذَرَأَ مِنَ الْحَرْثِ وَالْأَنْعَامِ نَصِيبًا فَقَالُوا هَٰذَا لِلَّهِ بِزَعْمِهِمْ وَهَٰذَا لِشُرَكَائِنَا ۖ فَمَا كَانَ لِشُرَكَائِهِمْ فَلَا يَصِلُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَمَا كَانَ لِلَّهِ فَهُوَ يَصِلُ إِلَىٰ شُرَكَائِهِمْ ۗ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ

तथा उन लोगों ने, उस खेती और पशुओं में, जिन्हें अल्लाह ने पैदा किया है, उसका एक भाग निश्चित कर दिया, फिर अपने विचार से कहते हैं: ये अल्लाह का है और ये उन (देवताओं) का है, जिन्हें उन्होंने (अल्लाह का) साझी बनाया है। फिर जो उनके बनाये हुए साझियों का है, वह तो अल्लाह को नहीं पहुँचता, परन्तु जो अल्लाह का है, वह उनके साझियों[1] को पहुँचता है। वे क्या ही बुरा निर्णय करते हैं!
____________________
1. इस आयत में अरब के मुश्रिकों की कुछ धार्मिक परम्पराओं का खण्डन किया गया है कि सब कुछ तो अल्लाह पैदा करता है और यह उस में से अपने देवताओं का भाग बनाते हैं। फिर अल्लाह का जो भाग है उसे देवताओं को दे देते हैं। परन्तु देवताओं के भाग में से अल्लाह के लिये व्यय करने को तैयार नहीं होते।

तफ़सीर

अल्लाह के साथ शिर्क करने वालों ने यह तरीक़ा निकाला कि अल्लाह की पैदा की हुई फसलों और मवेशियों में से उसके लिए एक हिस्सा निर्धारित कर दिया और यह दावा किया कि वह (हिस्सा) अल्लाह का है, और दूसरा हिस्सा उनकी मूर्तियों और थानों के लिए है। फिर उन्होंने जो हिस्सा अपने साझियों के लिए आवंटित किया है, वह उन मसरफ़ों तक नहीं पहुँचता, जिनमें ख़र्च करना अल्लाह ने धर्मसंगत बनाया है, जैसे ग़रीब और मिसकीन लोग। तथा उन्होंने जो हिस्सा अल्लाह के लिए निर्धारित किया है, वह उनके साझियों यानी मूर्तियों को पहुँच जाता है, वह उनके हितों में खर्च किया जा सकता है। उनका यह निर्णय और विभाजन बहुत बुरा है।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें