सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:1
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَجَعَلَ الظُّلُمَاتِ وَالنُّورَ ۖ ثُمَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ
सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने आकाशों तथा धरती को बनाया तथा अंधेरे और उजाला बनाया, फिर भी जो काफ़िर हो गये, वे दूसरों को अपने पालनहार के बराबर समझते[1] हैं।
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1. अर्थात वह अंधेरों और प्रकाश में विवेक (अन्तर) नहीं करते, और रचित को रचयिता का स्थान देते हैं।
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1. अर्थात वह अंधेरों और प्रकाश में विवेक (अन्तर) नहीं करते, और रचित को रचयिता का स्थान देते हैं।
तफ़सीर
परम पूर्णता से विशिष्ट करना और प्रेम के साथ सर्वोच्च सद्गुणों द्वारा प्रशंसा, उस अल्लाह के लिए साबित है, जिसने बिना किसी पूर्व उदाहरण के आकाशों तथा धरती की रचना की, तथा रात और दिन की रचना की, जो एक-दूसरे के बाद आते रहते हैं। चुनाँचे उसने रात को अँधेरी और दिन को प्रकाशमान बनाया। इसके बावजूद, जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे उसके अलावा को उसके बराबर ठहराते हैं और उसे उसका साझीदार बना लेते हैं।
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