सूरह 59 · जुज़ 28
Al-Hashr · 59:12
لَئِنْ أُخْرِجُوا لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ وَلَئِنْ قُوتِلُوا لَا يَنْصُرُونَهُمْ وَلَئِنْ نَصَرُوهُمْ لَيُوَلُّنَّ الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنْصَرُونَ
यदि वे निकाले गये तो ये उनके साथ नहीं निकलेंगे और यदि उनसे युध्द हो, तो वे उनकी सहायता नहीं करेंगे और यदि उनकी सहायता की (भी,) तो अवश्य पीठ दिखा देंगे, फिर कहीं से कोई सहायता नहीं पायेंगे।
तफ़सीर
अगर मुसलमानों ने यहूदियों को निकाल दिया, तो वे उनके साथ नहीं निकलेंगे। और अगर मुसलमानों ने उनसे युद्ध किया, तो वे उनकी सहायता और मदद नहीं करेंगे। और अगर उनकी मदद और सहायता करने के लिए निकले भी, तो उनसे पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे। फिर इसके बाद मुनाफ़िक़ों की मदद नहीं की जाएगी, बल्कि अल्लाह उन्हें अपमानित और तिरस्कृत करेगा।
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