सूरह 59 · जुज़ 28

Al-Hashr · 59:11

۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نَافَقُوا يَقُولُونَ لِإِخْوَانِهِمُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَئِنْ أُخْرِجْتُمْ لَنَخْرُجَنَّ مَعَكُمْ وَلَا نُطِيعُ فِيكُمْ أَحَدًا أَبَدًا وَإِنْ قُوتِلْتُمْ لَنَنْصُرَنَّكُمْ وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ

क्या आपने उन्हें[1] नहीं देखा, जो मुनाफ़िक़ (अवसरवादी) हो गये और कहते हैं अपने अह्ले किताब भाईयों से कि यदि तुम्हें देश निकाला दिया गया, तो हम अवश्य निकल जायेंगे तुम्हारे साथ और नहीं मानेंगे तुम्हारे बारे में किसी की (बात) कभी और यदि तुमसे युध्द हुआ तो हम अवश्य तुम्हारी सहायता करेंगे तथा अल्लाह गवाह है कि वे झूठे हैं।
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1. इस से अभिप्राय अब्दुल्लाह बिन उबय्य मुनाफ़िक़ और उस के साथी हैं। जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यहूद को उन के वचन भंग तथा षड्यंत्र के कारण दस दिन के भीतर निकल जाने की चेतावनी दी, तो उस ने उन से कहा कि तुम अड़ जाओ। मेरे बीस हज़ार शस्त्र युवक तुम्हारे साथ मिल कर युध्द करेंगे। और यदि तुम्हें निकाला गया तो हम भी तुम्हारे साथ निकल जायेंगे। परन्तु यह सब मौखिक बातें थीं।

तफ़सीर

क्या (ऐ रसूल) आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्होंने कुफ़्र को छिपाया और ईमान का प्रदर्शन किया कि वे विकृत तौरात को मानने वाले यहूदियों में से अपने काफ़िर भाइयों से कहते हैं : अपने घरों के अंदर डटे रहो, हम तुम्हारी सहायता से पीछे नहीं हटेंगे और तुम्हें असहाय नहीं छोड़ेंगे। यदि मुसलमानों ने तुम्हें यहाँ से बाहर निकाल दिया, तो हम भी तुम्हारे साथ एकजुटता दिखाते हुए निकल खड़े होंगे। तथा हम किसी की भी बात नहीं मानेंगे, जो हमें तुम्हारे साथ बाहर जाने से रोकना चाहेगा। और अगर मुसलमानों ने तुमसे युद्ध किया, तो हम उनके विरुद्ध तुम्हारी मदद करेंगे। हालाँकि अल्लाह गवाही देता है कि निःसंदेह मुनाफ़िक़ अपने इस दावे में झूठे हैं कि यदि यहूदियों को निकाला गया तो वे उनके साथ निकल खड़े होंगे और यदि उनसे युद्ध किया गया तो वे उनकी ओर से युद्ध करेंगे।

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