सूरह 57 · जुज़ 27

Al-Hadid · 57:20

اعْلَمُوا أَنَّمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌ وَزِينَةٌ وَتَفَاخُرٌ بَيْنَكُمْ وَتَكَاثُرٌ فِي الْأَمْوَالِ وَالْأَوْلَادِ ۖ كَمَثَلِ غَيْثٍ أَعْجَبَ الْكُفَّارَ نَبَاتُهُ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَاهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَكُونُ حُطَامًا ۖ وَفِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ شَدِيدٌ وَمَغْفِرَةٌ مِنَ اللَّهِ وَرِضْوَانٌ ۚ وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا إِلَّا مَتَاعُ الْغُرُورِ

जान लो कि सांसारिक जीवन एक खेल, मनोरंजन, शोभा,[1] आपस में गर्व तथा एक-दूसरे से बढ़ जाने का प्रयास है, धनों तथा संतान में। उस वर्षा के समान भा गयी किसानों को जिसकी उपज, फिर वह पक गयी, तो तुम उसे देखने लगे पीली, फिर वह हो जाती है चूर-चूर और परलोक में कड़ी यातना है तथा अल्लाह की क्षमा और प्रसन्नता है और सांसारिक जीवन तो बस धोखे का संसाधन है।
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1. इस में संसारिक जीवन की शोभा की उपमा वर्षा की उपज की शोभा से दी गई है। जो कुछ ही दिन रहती है फिर चूर-चूर हो जाती है।

तफ़सीर

जान लो कि इस दुनिया का जीवन मात्र एक खेल है जिसके साथ शरीर खेलते हैं, और एक मनोरंजन है जिसके साथ दिल मनोरंजन करते हैं, एक अलंकरण (सजावट) है जिसके साथ तुम खुद को सुशोभित करते हो, उसमें जो धन और सामाग्री तथा सत्ता है उनके द्वारा तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना है, तथा धन की बहुतायत और बच्चों की बहुतायत के बारे में शेखी बघारना है। इसका उदाहरण उस वर्षा की तरह है, जिससे पैदा होने वाली फसल किसान को खूब अच्छी लगती है, फिर कुछ ही समय में यह हरी-भरी फसल सूख जाती है, फिर (ऐ देखने वाले!) तुम उसे हरी होने के बाद पीली देखते हो, फिर अल्लाह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है। और आख़िरत में काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों के लिए कड़ी यातना है और अल्लाह की ओर से उसके मोमिन बंदों के गुनाहों की माफ़ी और उसकी प्रसन्नता है। और इस संसार का जीवन एक नश्वर सामान के अलावा और कुछ नहीं है जिसमें कोई स्थिरता नहीं है। इसलिए जो कोई इसके नश्वर सामान को आख़िरत की नेमतों पर तरजीह देता है, तो वह घाटा उठाने वाला और धोखा ग्रस्त है।

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